સ્વાધ્યાયપોથી — સંપૂર્ણ ઉકેલ (પાઠ ૧ થી ૯)
નીચે આપેલ પાઠનું બટન દબાવો — ફક્ત એ જ પાઠ ખૂલશે. પછી અંદરના વિભાગ પર ટૅપ કરી જવાબો જુઓ.
કોઈ પરિણામ મળ્યું નથી.
१ अभ्यास (पृष्ठ 2 - 3)
उज्ज्वल
और
क्षमता (क् + ष)
डॉक्टर
दूध (द + ऊ)
दृष्टि (द + ऋ)
धन
धरा
नाविक
मंदिर (म + अं)
मनुष्य (म + अ)
मित्र (म + इ)
योद्धा
शांति
श्रृंखला (श् + र)
सुख (स + उ)
स्वर (स् + व)
हृदय
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 2 - 3)
- तेरी रहमत से हम सबने, ये जिस्म-ओ-जाँ पाए हैं। तू अपनी नजर हम पर रखना किस हाल में हैं, ये खबर रखना।
- (2) हे प्रभु ! ये सारा संसार तेरा है, तू बड़ा दयालु है। तू हम पर अपनी दया दृष्टि रखना।
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना। हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना। (फिल्म - अंकुश)
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 4 - 7)
- (1) नदी = नदियाँ
- (2) किताब = किताबें
- (3) दरवाजे = दरवाजा
- (4) कला = कलाएँ
- (5) कौआ = कौए
- (6) धातुएँ = धातु
- (7) सड़कें = सड़क
- (8) कुत्ता = कुत्ते
- (1) चौ : चौराहा, चौमासा, चौकोर
- (2) बिन : बिनबात, बिनब्याहा, बिनमाँगे
- (3) पर : परदेश, परलोक, परोपकार
- (4) अन : अनपढ़, अनहोनी, अनजान
- (5) अध : अधपका, अधमरा, अधजला
- (1) मनुष्यता = ता
- (2) धनवान = वान
- (3) रसोइया = इया
- (4) टोकरी = ई
- (5) इकहरा = हरा
- (6) धोखेबाज = बाज
- (7) बलवती = वती
- (8) भाग्यवान = वान
४ योग्यता-विस्तार
भिन्न-भिन्न प्रार्थनाओं का संकलन कीजिए।
वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें।
ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हों हमारे करम।
दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना।
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना।
१ अभ्यास (पृष्ठ 13-14)
इसके अलावा मैं इस कहानी को "हामिद का चिमटा" या "दादी का सच्चा प्रेम" शीर्षक देना चाहूँगा। क्योंकि पूरी कहानी का मुख्य आकर्षण हामिद का त्याग और उसके द्वारा खरीदा गया चिमटा है, जो उसकी दादी के प्रति असीम प्रेम को दर्शाता है।
- आश्रित का विलोम - निराश्रित
- अवनति का विलोम - उन्नति
- (5) परिच्छेद के आधार पर अपने साथियों से पूछने के लिए तीन प्रश्न बनाइए।
- १. दधीचि ने अपना शरीर क्यों त्याग दिया था?
- २. वर्तमान में सामाजिक संस्थाएँ देश के लिए क्या कर रही हैं?
- ३. मनुष्य जीवन को किस भावना के बिना निरर्थक माना गया है?
- (6) इस परिच्छेद को उचित शीर्षक दीजिए।
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 14-15)
- शीतल: समानार्थी - ठंडा, ठंढा ; विरोधी - उष्ण, गर्म
- प्रसन्न: समानार्थी - खुश, आनंदित ; विरोधी - अप्रसन्न, उदास, खिन्न
- गरीब: समानार्थी - दरिद्र, निर्धन ; विरोधी - अमीर, धनवान
- अंधकार: समानार्थी - अँधेरा, तम ; विरोधी - प्रकाश, उजाला
- स्नेह: समानार्थी - प्रेम, प्यार ; विरोधी - नफरत, घृणा
- पुरानी: समानार्थी - प्राचीन, प्राक्तन ; विरोधी - नई, नवीन
- (1) बेड़ा पार लगाना: (अर्थ - किनारे ले जाना, संकट से बचाना)
- वाक्य प्रयोग: भगवान ही गरीबों और बेसहारा लोगों का बेड़ा पार लगाते हैं।
- (2) बाल बाँका न होना: (अर्थ - जरा भी नुकसान न होना)
- वाक्य प्रयोग: मेरे बहादुर चिमटे का तुम्हारे खिलौने बाल भी बाँका नहीं कर सकते।
- (3) छाती पीट लेना: (अर्थ - दुःख प्रकट करना)
- वाक्य प्रयोग: मेले से भूखे-प्यासे हामिद को चिमटा लाते देखकर दादी अमीना ने अपनी छाती पीट ली।
- (4) दिल चीरना: (अर्थ - बहुत दुःख पहुँचाना या मर्माहत करना) (पाठ में 'दिल कचोटना' का अर्थ कुछ न पाने पर दुःख होना है)
- वाक्य प्रयोग: बेटे की बुरी बातों ने बूढ़े पिता का दिल चीर दिया।
कहानी का शीर्षक : असली माँ (सच्चा न्याय)
एक नगर में दो स्त्रियाँ रहती थीं। एक दिन उन दोनों के बीच एक छोटे से बालक को लेकर गहरा विवाद हो गया। दोनों ही स्त्रियाँ उस बच्चे पर अपना-अपना दावा कर रही थीं और कह रही थीं कि "यह बच्चा मेरा है।" जब आपस में उनकी तकरार बहुत बढ़ गई, तो मामले को सुलझाने के लिए वे दोनों न्यायाधीश के समक्ष पहुँचीं।
न्यायाधीश ने दोनों स्त्रियों की बातें बहुत ध्यान से सुनीं, लेकिन यह तय करना मुश्किल था कि असली माँ कौन है। अंत में न्यायाधीश ने न्याय करने के लिए एक तरकीब सोची। उन्होंने अपने सिपाही से कहा, "इस बालक के दो टुकड़े कर दो और दोनों स्त्रियों में आधा-आधा बाँट लो।"
यह कठोर बात सुनकर झूठा दावा करने वाली एक स्त्री मौन रही, उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। परंतु दूसरी स्त्री फूट-फूटकर रोने लगी और न्यायाधीश से हाथ जोड़कर कहने लगी, "महाराज! कृपया बच्चे को न काटें, उसे उसी स्त्री को दे दें। कम से कम मेरा बच्चा ज़िंदा तो रहेगा।"
न्यायाधीश को तुरंत पता चल गया कि असली माँ कौन है, क्योंकि एक सच्ची माँ अपने बच्चे की जान जाते नहीं देख सकती। न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया और रोती हुई स्त्री को उसका बालक सौंप दिया।
दूसरी तरफ, उसकी बड़ी बहन ने भी घर पर छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर माँ का हाथ बँटाना शुरू कर दिया। अंकित और उसकी बहन की यह मेहनत और लगन देखकर माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। परिवार के तीनों सदस्यों की मेहनत रंग लाई。
कुछ महीनों बाद जब अंकित की दसवीं कक्षा का परिणाम आया, तो उसने पूरे शहर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसकी इस सफलता पर सरकार की ओर से उसे आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिल गई। अब माँ को उसकी फीस की कोई चिंता नहीं थी। अपने अथक परिश्रम और सूझबूझ से अंकित ने घर में फिर से सुख और समृद्धि ला दी थी।
१ अभ्यास (पृष्ठ 20)
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 20 - 21)
- १. उन्होंने 29 घंटे 17 मिनट तक स्पेसवॉक करके एक नया अंतरिक्ष रिकॉर्ड बनाया।
- २. वे अंतरिक्ष के बोस्टन मैराथन में साढ़े चार घंटे में 42 किलोमीटर का सफर तय करने वाली प्रथम अंतरिक्षयात्री बनीं।
- ३. अंतरिक्ष में 188 दिन और चार घंटे रहने का शैनोन ल्यूसिक का पुराना रिकॉर्ड भी सुनीता ने तोड़ा।
- (1) इंदिरा गांधी: ये स्वतंत्र भारत की प्रथम और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री थीं। इन्हें 'आयरन लेडी' (लौह महिला) के नाम से जाना जाता है।
- (2) सानिया मिर्जा: ये भारत की एक बहुत ही प्रसिद्ध और सफल महिला टेनिस खिलाड़ी हैं। इन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई खिताब जीते हैं।
- (3) किरण बेदी: ये भारत की प्रथम महिला आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं। इन्होंने पुलिस सेवा और तिहाड़ जेल के सुधारों में बड़ा योगदान दिया है।
- (4) मल्लिका साराभाई: ये भारत की एक सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना (भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी) और समाज सेविका हैं। ये अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की पुत्री हैं।
- (5) कल्पना चावला: ये अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की प्रथम महिला अंतरिक्षयात्री थीं, जिनका शटल दुर्घटना में निधन हो गया था।
- (6) पी. टी. ऊषा: ये भारत की एक महान महिला धाविका (एथलीट) हैं। इन्हें दौड़ में अपनी गति के कारण 'पय्योली एक्सप्रेस' और 'उड़नपरी' भी कहा जाता है।
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 22)
• उपर्युक्त उदाहरणों के आधार पर निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए : (साधु, कुतिया, युवक, पुत्र, पड़ोसिन, बाघ, ठाकुर, सन्यासी, सम्राट, वर)
- (1) साधु का स्त्रीलिंग - साध्वी
- (2) कुतिया का पुल्लिंग - कुत्ता
- (3) युवक का स्त्रीलिंग - युवती
- (4) पुत्र का स्त्रीलिंग - पुत्री
- (5) पड़ोसिन का पुल्लिंग - पड़ोसी
- (6) बाघ का स्त्रीलिंग - बाघिन
- (7) ठाकुर का स्त्रीलिंग - ठकुराइन
- (8) सन्यासी का स्त्रीलिंग - सन्यासिनी
- (9) सम्राट का स्त्रीलिंग - साम्राज्ञी
- (10) वर का स्त्रीलिंग - वधू
४ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 22 - प्रवृत्तियाँ)
१ अभ्यास (पृष्ठ 24)
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 24 - 26)
काले-काले बादल छाए, रिमझिम-रिमझिम बारिश लाए। हरे-भरे सब वृक्ष नहाए, सुंदर-सुंदर फूल खिलाए। रंग-बिरंगी तितली उड़ती, खुशी से यह प्रकृति है झूमती।
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 26 - 27)
• निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा ढूँढ़कर उसका भेद बताइए।
• निम्नलिखित एकवचन वाक्य को बहुवचन में परिवर्तित कीजिए :
• निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित भाववाचक संज्ञाओं को जातिवाचक संज्ञा में परिवर्तित करके वाक्य फिर से लिखिए :
४ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 27)
• शिक्षक की मदद से प्रकृति के तत्त्वों पर आधारित काव्यों का संकलन कीजिए।
प्रकृति की सुंदरता निराली, हर डाली पर छाई हरियाली। नदियाँ कल-कल करती बहतीं, पर्वत शिखरों से ये कहतीं। सूरज, चाँद और ये तारे, लगते हमको बहुत ही प्यारे।
१ अभ्यास (पृष्ठ 32)
- १. "सर, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का भविष्य कैसा है?"
- २. "विद्यार्थी जीवन में मिलने वाली असफलता और निराशा से कैसे निपटना चाहिए?"
"व्यायाम करते समय कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए। प्रातःकाल शौचादि से निवृत्त होकर, खाली पेट व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम के समय शरीर के सभी अंग-प्रत्यंग प्रभावित होने चाहिए; अन्यथा अंगों की सुड़ौलता एवं शक्ति में असंतुलन आ जाता है। श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया व्यायाम के अनुसार ध्यानपूर्वक करनी चाहिए किन्तु यदि श्वास फूलने लगे तो तत्काल व्यायाम बन्द कर देना चाहिए। व्यायाम में नियमितता का होना अत्यंत आवश्यक है।"
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 32-33)
- (1) जी-तोड़ मेहनत करना: (अर्थ - बहुत अधिक परिश्रम करना)
- वाक्य प्रयोग: परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए रमेश ने जी-तोड़ मेहनत की।
- (2) महारत हासिल करना: (अर्थ - योग्यता, निपुणता या विशेषज्ञता प्राप्त करना)
- वाक्य प्रयोग: जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं और कठिनाइयों को पराजित करने में महारत हासिल करनी होगी।
कहानी का शीर्षक : नेवले की वफादारी (या बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए)
एक गाँव में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी (ब्राह्मणी) रहते थे। उनके घर में एक छोटा सा बच्चा था। ब्राह्मणी ने घर में एक नेवला पाल रखा था, जो बच्चे से बहुत हिल-मिल गया था। एक दिन ब्राह्मणी अपने बच्चे को पालने में सुलाकर कुएँ पर पानी भरने के लिए बाहर गई। जब वह पानी का घड़ा भरकर लौटी, तो उसने दरवाजे पर नेवले को देखा। नेवले का मुँह खून से सना हुआ था। ब्राह्मणी घबरा गई। उसे लगा कि इस भयानक जानवर ने उसके प्यारे बच्चे को मार डाला है।
इसी शंका और क्रोध में आकर उसने पानी से भरा भारी घड़ा नेवले पर जोर से पटक दिया। नेवला वहीं तड़पकर मर गया। जब ब्राह्मणी दौड़कर अंदर गई, तो उसने देखा कि उसका बच्चा तो पालने में सुरक्षित सो रहा है। लेकिन पालने के पास ही एक भयंकर जहरीला साँप मरा हुआ पड़ा है, जिसके टुकड़े हो गए थे। तब ब्राह्मणी को पूरी बात समझ में आई कि नेवले ने बच्चे की रक्षा के लिए साँप से लड़ाई की और उसे मार डाला था। अपनी जल्दबाजी पर ब्राह्मणी फूट-फूट कर रोने लगी, लेकिन अब पछताने से क्या फायदा!
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 33-34)
• निम्नलिखित वाक्यों में सर्वनाम शब्द छाँटिएँ तथा उनके प्रकार भी बताइए।
• कोष्ठक में दिए गए सर्वनाम शब्दों के उचित रूप से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
४ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 34)
• एक छात्र के रूप में राष्ट्र के विकास में आप क्या योगदान कर सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।
५ पुनरावर्तन 1 (पृष्ठ 35)
आकार
गृह
थोड़ा
निशा
पेट
फल
राष्ट्रभाषा
समीक्षा
सूर्य
- (1) युवक -> युवती : (वाक्य) उपवन में एक सुंदर युवती गीत गा रही है।
- (2) पंडित -> पंडिताइन : (वाक्य) पंडिताइन मंदिर में भगवान की पूजा कर रही हैं।
- (3) छात्र -> छात्रा : (वाक्य) हमारी कक्षा की छात्रा ने दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- (4) अध्यापक -> अध्यापिका : (वाक्य) अध्यापिका बच्चों को बहुत ही स्नेह से पढ़ा रही हैं।
- (5) डॉक्टर -> महिला डॉक्टर : (वाक्य) अस्पताल में एक नई महिला डॉक्टर आई हैं। (नोट: बोलचाल में 'डॉक्टरनी' भी कहा जाता है, पर 'महिला डॉक्टर' अधिक शुद्ध है।)
- (6) माली -> मालिन : (वाक्य) मालिन ताजे फूलों की माला गूँथ रही है।
- (1) मूर्ति -> मूर्तियाँ : (वाक्य) भारत के प्राचीन मंदिरों में कई सुंदर मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं।
- (2) दिशा -> दिशाएँ : (वाक्य) सूर्य के निकलते ही चारों दिशाएँ प्रकाश से जगमगा उठीं।
- (3) कहानी -> कहानियाँ : (वाक्य) मेरी दादी माँ मुझे रात को सोने से पहले नई-नई कहानियाँ सुनाती हैं।
- (4) गमला -> गमले : (वाक्य) मेरे घर के बगीचे में रंग-बिरंगे फूलों के कई गमले रखे हुए हैं।
- (1) वि + ज्ञान = विज्ञान (अथवा अ + ज्ञान = अज्ञान)
- (2) मानव + ता = मानवता
- (3) सम् + मुख = सम्मुख (अथवा वि + मुख = विमुख)
- (4) गैर + हाजिर = गैरहाजिर
- (5) समाज + इक = सामाजिक (यहाँ 'स' का 'सा' हो जाता है नियम के अनुसार)
- (6) कुल + पति = कुलपति (अथवा कुल + ईन = कुलीन)
- (7) अ + हिंसा = अहिंसा
- (8) शान + दार = शानदार
१ अभ्यास (पृष्ठ 40-41)
- जंगल: वन, कानन, अरण्य
- घर: गृह, आवास, भवन
- बहुत: अधिक, ज्यादा, प्रचुर
- (5) इस परिच्छेद-आधारित दो सवाल बनाइए।
- १. जंगल किन चीजों का भंडार घर है?
- २. एक अच्छा जंगल क्या-क्या उगाकर रखता है?
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 41-42)
- १. युवावस्था में वे महलों में रहकर पृथ्वी की रक्षा और प्रजा का पालन करते हैं।
- २. वृद्धावस्था आने पर वे वन में जाकर जितेन्द्रिय तपस्वियों के आश्रम में वृक्षों के नीचे कुटिया बनाकर रहते हैं।
कहानी का शीर्षक : ईमानदार लकड़हारा
एक गाँव में एक बहुत ही गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज पास के जंगल में जाता, लकड़ियाँ काटता और उन्हें बेचकर अपने परिवार का पेट पालता था। एक दिन वह नदी के किनारे एक पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काट रहा था। अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी फिसल गई और नीचे गहरी नदी में गिर गई।
लकड़हारा पेड़ से उतरा और नदी के किनारे बैठकर फूट-फूटकर रोने लगा, क्योंकि उसके पास दूसरी कुल्हाड़ी खरीदने के भी पैसे नहीं थे। उसकी सच्ची पुकार सुनकर नदी में से जल-देवता प्रकट हुए। उन्होंने लकड़हारे से रोने का कारण पूछा। लकड़हारे ने सारी बात बता दी।
जल-देवता ने नदी में डुबकी लगाई और बाहर आकर लकड़हारे को एक 'सोने की कुल्हाड़ी' दिखाई और पूछा, "क्या यह कुल्हाड़ी तुम्हारी है?" लकड़हारे ने कहा, "नहीं प्रभु! मेरी कुल्हाड़ी सोने की नहीं है।" जल-देवता ने फिर डुबकी लगाई और इस बार 'चाँदी की कुल्हाड़ी' निकाली। लकड़हारे ने इसे भी अपनी मानने से इनकार कर दिया।
तीसरी बार जल-देवता ने 'लोहे की कुल्हाड़ी' निकाली। उसे देखते ही लकड़हारा खुशी से उछल पड़ा और बोला, "हाँ प्रभु! यही मेरी कुल्हाड़ी है।" जल-देवता लकड़हारे की इस ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे उसकी लोहे की कुल्हाड़ी तो दी ही, साथ में सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी इनाम के रूप में दे दीं। लकड़हारा खुशी-खुशी अपने घर लौट गया।
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 42-44)
• आप विशेषण तथा उसके प्रकार पढ़ चुके हैं। निम्नलिखित वाक्यों में विशेषण पहचानकर उनके प्रकार लिखिए :
• निम्नलिखित विशेषणों का तीन प्रकार से वाक्य में उपयोग कीजिए: (પાઠ્યપુસ્તકમાં આપેલા ઉદાહરણ (क, ख, ग) મુજબ ત્રણેય કક્ષાઓમાં વાક્યો બનાવવાના છે)
• लिंग-परिवर्तन इन उदाहरण के आधार पर निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिर्वतन कीजिए :
- (1) हिरन = हिरनी
- (2) शिक्षक = शिक्षिका
- (3) पंडित = पंडिताइन
४ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 44)
(આ પ્રવૃત્તિઓ વિદ્યાર્થીઓએ જાતે અથવા વર્ગખંડમાં કરવાની છે. તેનો માર્ગદર્શક ઉત્તર નીચે મુજબ છે:)
• पुस्तकालय से पुस्तक लेकर दुष्यंत-शकुंतला की कथा पढ़िए।
• इस एकांकी का छात्रों से नाट्यीकरण करवाइए।
१ अभ्यास (पृष्ठ 45-46)
• नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। फिर उन पर आधारित प्रश्नों पर कक्षा में वाद-विवाद करवाइए :
- चित्र 1 (गाँव) : गाँव के चित्र में प्राकृतिक दृश्य है, जहाँ नदी बह रही है। लोग नदी में नहा रहे हैं, औरतें पानी भर रही हैं और कपड़े धो रही हैं। कुछ लोग जानवरों को पानी पिला रहे हैं। कच्चे घर, पेड़-पौधे और खुला, प्रदूषण मुक्त वातावरण दिखाई दे रहा है।
- चित्र 2 (नगर/शहर) : नगर के चित्र में पक्की और चौड़ी सड़कें हैं। वाहनों (कार, बस) की भारी भीड़ है। बड़ी-बड़ी इमारतें (बहुमंजिला मकान) हैं। यातायात के साधनों और फैक्ट्रियों के कारण शहर में प्रदूषण और शोरगुल दिखाई दे रहा है।
- (2) गाँव तथा नगर के जीवन में क्या अंतर है और तुम्हें कौन-सा रुचिकर लगता है ? क्यों ?
• नीचे दिए हुए मुद्दों के आधार पर "विज्ञान वरदान या अभिशाप" इस विषय के एक पक्ष पर अपने विचार कारण सहित प्रस्तुत कीजिए। (मुद्दे: प्रदूषण, बिजली, अंतरिक्ष की खोज, डॉक्टरी सुविधा, दूरभाष, कम्प्यूटर, परमाणु, बम, पिस्तौल, यातायात, ग्लोबल वॉर्मिंग)
विज्ञान वरदान के रूप में (पक्ष): विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को बेहद सुखद और आरामदायक बना दिया है। बिजली, दूरभाष (टेलीफोन/मोबाइल), कम्प्यूटर, इंटरनेट और यातायात के साधनों ने पूरी दुनिया को एक गाँव बना दिया है। चिकित्सा (डॉक्टरी सुविधा) के क्षेत्र में असाध्य रोगों का इलाज संभव हुआ है जिससे मृत्यु दर घटी है। अंतरिक्ष की खोजों ने हमें नए ग्रहों की जानकारी दी है।
विज्ञान अभिशाप के रूप में (विपक्ष): विज्ञान के कारण ही प्रदूषण और 'ग्लोबल वॉर्मिंग' जैसी भयानक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। कारखानों से निकलने वाले धुएँ और रसायनों ने पर्यावरण को दूषित कर दिया है। विज्ञान ने हमें परमाणु बम, मिसाइल और पिस्तौल जैसे घातक हथियार दिए हैं, जो चंद मिनटों में पूरी दुनिया को नष्ट कर सकते हैं। अतः यदि विज्ञान का उपयोग विनाश के लिए हो, तो यह एक बड़ा अभिशाप है।
• कौन शक्तिशाली है 'कलम या तलवार', अपने विचार कारण सहित बताइए।
• दी गई सामग्री (बहुत दूर जन्म ले रहा है धरती जैसा ग्रह) पढ़िए और उसके आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
- ४२४ प्रकाश वर्ष = पृथ्वी से नए ग्रह की दूरी
- १.६ करोड़ वर्ष = नए ग्रह की उम्र
- १० करोड़ वर्ष = पूर्ण ग्रह बनने में लगनेवाला समय
- स्पिट्जर स्पेस = नासा का टेलिस्कोप
- कैरी सिस्से = वैज्ञानिक
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 47-48)
- (1) भिन्न = विभिन्न
- (2) देश = विदेश (या प्रदेश)
- (3) पका = अध्पका
- (4) गम = दुर्गम
- (5) योग = प्रयोग (या वियोग)
- (6) जीव = निर्जीव
- (7) बल = निर्बल (या दुर्बल)
- (8) समझ = गैरसमझ (या नासमझ, परंतु दिए गए कोष्ठक के अनुसार 'गैर' उपसर्ग उचित है)
- (9) सुविधा = असुविधा
- (10) वांछित = अवांछित
- (1) नियम + इत = नियमित
- (2) विदेश + ई = विदेशी
- (3) प्रकृति + इक = प्राकृतिक ('प्रकृति' में 'इक' प्रत्यय लगने से पहला स्वर दीर्घ हो जाता है)
- (4) पुत्र + ई = पुत्री
- (5) लापरवाह + ई = लापरवाही
- (6) चंचल + ता = चंचलता
- (7) यंत्र + इक = यांत्रिक ('यंत्र' में 'इक' लगने से यांत्रिक बनता है)
- (8) मानव + ता = मानवता
- (9) हँस + ई = हँसी
- पता: १२, विकास नगर सोसाइटी, अहमदाबाद। दिनांक : 26 जुलाई 2026
- प्रिय मित्र रमेश, सप्रेम नमस्ते।
- मैं यहाँ कुशल-मंगल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी वहाँ आनंद से होगे। तुमने अपने पिछले पत्र में मुझसे पूछा था कि मैं बड़ा होकर देश के लिए क्या बनना चाहता हूँ। मित्र, मैं बड़ा होकर एक 'सैनिक' बनना चाहता हूँ。
- इसका कारण यह है कि एक सैनिक बनकर मैं अपने देश की सीमाओं की रक्षा कर सकता हूँ। देश के नागरिक तभी शांति से सो पाते हैं और अपना विकास कर पाते हैं, जब सीमा पर सैनिक मुस्तैदी से उनकी रक्षा कर रहे होते हैं। बाहरी दुश्मनों और आतंकवादियों से देश को बचाना मैं अपना परम कर्तव्य मानता हूँ। हालाँकि देश के लिए किसान भी बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वह अन्न उगाता है, फिर भी मुझे मातृभूमि की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने की अधिक प्रेरणा मिलती है。
- मैं कड़ी मेहनत करूँगा और एक दिन भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करूँगा। अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना。
- तुम्हारा मित्र, रोहित
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 48-49)
• निम्नलिखित वाक्यों में से ऐसे पद ढूंढिए जो 'अव्यय' हैं :
• सोचिए : आपने जिन शब्दों को अव्यय के रूप में चुना है, क्या वे अव्यय पद हैं? चर्चा कीजिए।
४ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 49)
(यह छात्रों के लिए वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने के नियमों की जानकारी है।)
१ अभ्यास (पृष्ठ 53)
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 53-54)
थोड़ी ही देर में शिकार करने वाला (आखेटक) देवदत्त वहाँ आ गया। उसने अपना शिकार माँगा, लेकिन तुम्हारे पिता ने उसे पक्षी देने से मना कर दिया क्योंकि उन्होंने उसकी रक्षा की थी। दोनों में विवाद बढ़ गया और मामला न्यायालय में गया, जहाँ सभी ने इस बात को सुना। यह कहानी सुनाकर माँ ने राहुल से पूछा, "बताओ बेटा, इस पक्षी पर किसका अधिकार होना चाहिए? तू निर्भय होकर न्याय कर"। राहुल ने तुरंत जवाब दिया, "मारने वाले से बचाने वाले का अधिकार बड़ा होता है। न्याय हमेशा दया का ही पक्ष लेता है"। यह सुनकर माँ बहुत खुश हुईं।
३ भाषा-सज्जता (पृष्ठ 54-56)
४ योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 56)
(આ પ્રવૃત્તિઓ વિદ્યાર્થીઓએ જાતે અથવા વર્ગખંડમાં કરવાની છે. તેનો માર્ગદર્શક ઉત્તર નીચે મુજબ છે:)
एक था कौआ, बहुत था प्यासा, घड़े में थोड़ा पानी था सा। कंकड़ उसने डाले घड़े में, पानी आया ऊपर मजे में। पीकर पानी कौआ उड़ गया, अपनी मेहनत से वह खुश हो गया।
१ अभ्यास (पृष्ठ 62)
२ स्वाध्याय (पृष्ठ 62 - 66)
- (1) दुहिता = पुत्री / बेटी
- वाक्य: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र दुहिता थी।
- (2) वेदना = पीड़ा / दुःख
- वाक्य: चोट लगने के कारण बीमार बच्चे के पैर में बहुत वेदना हो रही थी।
- (3) उत्कोच = घूस / रिश्वत
- वाक्य: एक सच्चा और ईमानदार अधिकारी कभी उत्कोच स्वीकार नहीं करता।
- (4) जीर्ण = वृद्ध / जर्जर / बहुत पुराना
- वाक्य: सत्तर वर्ष की उम्र में ममता का जीर्ण शरीर खाँसी से काँप रहा था।
- (5) आततायी = अन्यायी / दूसरों को त्रास देने वाला
- वाक्य: इतिहास गवाह है कि किसी भी आततायी को उसके पापों की सज़ा अवश्य मिलती है।
- आँख:
- आँखों का तारा होना: (अर्थ - बहुत प्यारा होना) वाक्य: मेरा बेटा मेरी आँखों का तारा है।
- आँखें खुलना: (अर्थ - सच्चाई का पता चलना या होश आना) वाक्य: परीक्षा में फेल होने के बाद ही रमेश की आँखें खुलीं।
- आँख चुराना: (अर्थ - सामना न करना या छिपना) वाक्य: उधार के पैसे न चुका पाने के कारण वह मुझसे आँखें चुराता है।
- माथा / सिर:
- माथा ठनकना: (अर्थ - संदेह होना या किसी अनिष्ट की आशंका होना) वाक्य: उस अजनबी की मीठी-मीठी बातें सुनकर मेरा माथा ठनका।
- सिर आँखों पर बैठाना: (अर्थ - बहुत अधिक आदर-सम्मान करना) वाक्य: अच्छे काम करने वालों को समाज सिर आँखों पर बैठाता है।
- सिर मुंडाते ही ओले पड़ना: (अर्थ - काम शुरू करते ही बाधा आना) वाक्य: अभी तो व्यापार शुरू ही किया था कि अचानक हड़ताल हो गई, इसे कहते हैं सिर मुंडाते ही ओले पड़ना।
- हाथ:
- हाथ बँटाना: (अर्थ - मदद करना) वाक्य: छुट्टी के दिन मैं घर के कामों में अपनी माँ का हाथ बँटाता हूँ।
- हाथ मलना: (अर्थ - पछताना) वाक्य: समय पर पढ़ाई न करने वाले छात्र परीक्षा के बाद हाथ मलते रह जाते हैं।
- हाथ पीले करना: (अर्थ - विवाह करना) वाक्य: एक गरीब पिता ने बड़ी मुश्किल से अपनी बेटी के हाथ पीले किए।
- कान:
- कान भरना: (अर्थ - चुगली करना या भड़काना) वाक्य: मंथरा ने रानी कैकेयी के कान भरे।
- कान पर जूँ न रेंगना: (अर्थ - किसी बात का कोई असर न होना) वाक्य: मैंने उसे बहुत समझाया पर उसके कान पर जूँ तक नहीं रेंगी।
- कान का कच्चा होना: (अर्थ - बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों पर विश्वास कर लेना) वाक्य: वह कान का कच्चा है, इसलिए सब पर शक करता है।
कहानी का शीर्षक : सिंह और गुलाम (या परोपकार का फल)
प्राचीन काल में एक अत्यंत निर्दयी राजा था। वह अपने सेवकों पर बहुत जुल्म करता था। एक दिन उसने अपने एक गुलाम (दास) को किसी छोटी सी गलती के लिए कठोर दंड दिया। राजा के अत्याचारों से तंग आकर वह गुलाम एक दिन मौका पाकर जंगल में भाग गया。
जंगल में भटकते हुए अचानक उसकी भेंट एक भयंकर सिंह (शेर) से हुई। गुलाम डर गया, परंतु उसने देखा कि सिंह लंगड़ाकर चल रहा है और दर्द से कराह रहा है। सिंह ने अपना एक पैर गुलाम के सामने कर दिया। गुलाम ने साहस करके देखा तो सिंह के पैर में एक बड़ा सा काँटा चुभा हुआ था। गुलाम ने दयालु होकर धीरे से वह काँटा निकाल दिया। सिंह को बहुत आराम मिला। दोनों में अच्छी मित्रता हो गई और वे जंगल में साथ-साथ रहने लगे。
कुछ दिनों बाद, राजा के सैनिकों ने जंगल में उस गुलाम को ढूँढ लिया और उसे गिरफ्तार करके वापस ले गए। राजा ने उसे मौत की सज़ा सुनाई। राजा ने तय किया कि उसे एक भूखे सिंह के सामने पिंजरे में छोड़ दिया जाए ताकि सिंह उसे खा जाए。
तय दिन पर, बड़े से मैदान में गुलाम को छोड़ दिया गया और पिंजरे से एक खूँखार भूखे सिंह को निकाला गया। सिंह दहाड़ता हुआ गुलाम की ओर झपटा, परंतु पास आते ही वह गुलाम को पहचान गया। यह वही सिंह था जिसके पैर से गुलाम ने काँटा निकाला था। सिंह उसे खाने के बजाय उसके पैरों में लोटने लगा और उसका हाथ चाटने लगा। सिंह का यह स्नेहपूर्ण व्यवहार देखकर राजा और सभी दरबारी हैरान रह गए。
जब राजा ने गुलाम से इसका कारण पूछा, तो उसने जंगल की पूरी घटना बता दी। एक खूँखार जानवर के ऐसे कृतज्ञतापूर्ण व्यवहार को देखकर राजा का मन भी पिघल गया। उसने गुलाम और सिंह दोनों को रिहा कर दिया (आज़ाद कर दिया)।
कहानी का शीर्षक - "इंसानियत" या "सच्ची सेवा"
एक दिन बहुत भयंकर गर्मी पड़ रही थी। तेज चिलचिलाती धूप में एक लाचार और प्यासी वृद्ध स्त्री (बूढ़ी औरत) रास्ते के किनारे बैठी थी। प्यास के कारण उसका बुरा हाल था। वह इतनी कमजोर थी कि उससे चला भी नहीं जा रहा था। वह रास्ते से गुजरने वाले लोगों से अपने लिए पानी माँग रही थी。
उસી रास्ते से कुछ लड़के हँसते-खेलते हुए निकले। उस वृद्ध स्त्री ने उनसे भी पानी माँगा, लेकिन वे लड़के बहुत लापरवाह थे। उन्होंने उस गरीब और प्यासी बुढ़िया की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और उसे बिना पानी पिलाए ही वहाँ से आगे चले गए。
थोड़ी देर बाद, उसी रास्ते से एक बहुत ही समझदार और दयालु लड़का गुजरा। उसने देखा कि एक बूढ़ी औरत जमीन पर बैठी है और प्यास से तड़प रही है। उस लड़के को उस वृद्ध स्त्री की ऐसी दयनीय हालत देखकर बहुत दया आई。
वह लड़का तुरंत गया और कहीं से एक बर्तन में पानी ले आया। उसने बहुत ही आदर और प्रेम के साथ उस प्यासी वृद्ध स्त्री को अपने हाथों से पानी पिलाया। ठंडा पानी पीकर उस स्त्री की प्यास बुझी और उसे बहुत राहत मिली。
पानी पीने के बाद, उस वृद्ध स्त्री ने खुश होकर उस दयालु लड़के को आशीर्वाद देते हुए कहा, "तुम बहुत अच्छे बच्चे हो।" उस छोटे से बालक ने अपनी सच्ची और निस्वार्थ सेवा से एक प्यासी वृद्ध स्त्री की मदद की。
संज्ञा (संज्ञा शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम होते हैं):
हिमालय: (वाक्य) हिमालय भारत के उत्तर में स्थित सबसे ऊँचा पर्वत है।
बड़ौदा: (वाक्य) बड़ौदा गुजरात राज्य का एक बहुत ही सुंदर और ऐतिहासिक शहर है।
सपना: (वाक्य) कल रात सोते समय मैंने एक बहुत ही डरावना सपना देखा। (या, सपना मेरी बहुत अच्छी सहेली है।)
साबरमती: (वाक्य) अहमदाबाद शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।
गुजरात: (वाक्य) गुजरात भारत का एक बहुत ही समृद्ध और विकासशील राज्य है।
सर्वनाम (जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं):
मुझे: (वाक्य) मुझे किताबें पढ़ना बहुत पसंद है।
तुम्हें: (वाक्य) तुम्हें रोज़ सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना चाहिए।
हमारा: (वाक्य) हमारा देश भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
विशेषण (जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं):
खट्टा: (वाक्य) यह नींबू बहुत खट्टा है।
सुंदर: (वाक्य) बगीचे में एक बहुत सुंदर मोर नाच रहा है।
छोटा: (वाक्य) मेरे पास एक छोटा और प्यारा सा पिल्ला है।
होशियार: (वाक्य) रोहन अपनी कक्षा का सबसे होशियार विद्यार्थी है।
३ पुनरावर्तन 2 (पृष्ठ 67 - 68)
संसार में धन से भी अधिक मूल्यवान क्या है?
हम जीवन में आगे किस प्रकार बढ़ सकते हैं?
समय का सबसे अच्छा उपयोग क्या है?
- संज्ञा (Noun): पर्वत, नदी, सूरत, बाल, नर्मदा, भारत
- पर्वत: (वाक्य) हिमालय भारत का सबसे ऊँचा पर्वत है।
- नदी: (वाक्य) गंगा भारत की एक पवित्र नदी है।
- सूरत: (वाक्य) सूरत कपड़ों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध शहर है।
- बाल: (वाक्य) उस छोटी बच्ची के बाल बहुत लंबे हैं।
- नर्मदा: (वाक्य) नर्मदा गुजरात की सबसे बड़ी नदी है।
- भारत: (वाक्य) मेरा देश भारत बहुत महान है।
- सर्वनाम (Pronoun): उसको, तुम्हें, हम
- उसको: (वाक्य) मैंने उसको पढ़ने के लिए एक अच्छी किताब दी।
- तुम्हें: (वाक्य) तुम्हें हमेशा बड़ों का आदर करना चाहिए।
- हम: (वाक्य) हम सब कल घूमने के लिए चिड़ियाघर जाएँगे।
- विशेषण (Adjective): मीठा, सुंदर, बड़ा, मेहनती
- मीठा: (वाक्य) यह आम बहुत मीठा है।
- सुंदर: (वाक्य) बगीचे में एक सुंदर मोर नाच रहा है।
- बड़ा: (वाक्य) मेरे चाचा जी का मकान बहुत बड़ा है।
- मेहनती: (वाक्य) रमेश एक बहुत ही मेहनती किसान है।
- (1) मोनिका अभी खाना बना रही थी।
- (2) हवाई जहाज ऊपर उड़ रहा है।
- (3) दिनभर यहाँ-वहाँ देखा।
- (4) शिक्षक ने विद्यार्थी की ओर देखकर कहा।
- (5) काम अधिक करो, बातें कम।
- (6) बिल्ली धीरे-धीरे बाहर निकल गई।
- मेरे शहर का नाम अहमदाबाद है।
- यह गुजरात राज्य का सबसे बड़ा और प्रमुख शहर है।
- अहमदाबाद शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।
- मेरे शहर में कई ऐतिहासिक इमारतें और सुंदर मंदिर हैं।
- यहाँ का 'कांकरिया तालाब' और 'साबरमती आश्रम' (गाँधी आश्रम) पूरे देश में बहुत प्रसिद्ध हैं।
- अहमदाबाद अपने सूती कपड़ों के व्यापार और कारखानों के लिए भी जाना जाता है।
- यहाँ के लोग बहुत मिलनसार, शांतिप्रिय और व्यापारी स्वभाव के हैं।
- मेरे शहर में यातायात की बहुत अच्छी सुविधाएँ हैं, जैसे बी.आर.टी.एस. (BRTS) और मेट्रो ट्रेन।
- यहाँ उत्तरायण (पतंग का त्योहार) और नवरात्रि का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।
- मुझे मेरा अहमदाबाद शहर बहुत पसंद है और मुझे यहाँ रहने पर गर्व है।
- (3) आपको पसंद हो ऐसी फिल्म का नाम बताकर संक्षेप में कहानी बताइए।

