STD 8 HINDI SWADHYANPOTHI 1 TO 9

વંથલી તાલુકા પ્રાથમિક શિક્ષક સંઘ
ધોરણ ૮ · હિન્દી — સ્વાધ્યાયપોથી ઉકેલ
ધોરણ ૮ હિન્દી

સ્વાધ્યાયપોથી — સંપૂર્ણ ઉકેલ (પાઠ ૧ થી ૯)

નીચે આપેલ પાઠનું બટન દબાવો — ફક્ત એ જ પાઠ ખૂલશે. પછી અંદરના વિભાગ પર ટૅપ કરી જવાબો જુઓ.

📘 આ ઉકેલ ફક્ત પરીક્ષાની તૈયારી અને ચકાસણી માટે છે. વિદ્યાર્થીઓએ પ્રથમ જાતે જવાબ શોધીને લખવાનો પ્રયત્ન કરવો.

કોઈ પરિણામ મળ્યું નથી.

01 तेरी है जमीं 4 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 2 - 3)
प्र. 1. यह प्रार्थना छात्रों को टेपरिकार्डर या मोबाईल के जरिए सुनाइए और इसका समूहगान करवाइए।
(यह छात्रों के लिए एक कक्षा-प्रवृत्ति है।) सभी छात्र टेपरिकॉर्डर या मोबाइल फोन की मदद से 'तेरी है जमीं' प्रार्थना गीत को ध्यान से सुनें और उसके बाद कक्षा में शिक्षक के साथ मिलकर मधुर स्वर में इसका सामूहिक गान करें।

प्र. 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) आपके मत से सृष्टि में सर्वोपरि कौन है ? क्यों ?
मेरे मत से सृष्टि में सर्वोपरि ईश्वर (खुदा/मालिक) है। क्योंकि उसी की मर्जी से हम इस दुनिया में आए हैं और उसी की कृपा से हमें यह शरीर और प्राण मिले हैं। वह सबसे बड़ी ताकत वाला है और हमारी हर मुश्किल को दूर कर सकता है。
(2) आप भगवान से क्या प्रार्थना करते हैं ?
हम भगवान से यह प्रार्थना करते हैं कि वह हम पर अपनी दया दृष्टि हमेशा बनाए रखे। हम किस हाल में हैं, इसकी वह हमेशा खबर रखे और हमारी रक्षा करे।
(3) आप ईश्वर से प्रार्थना किस समय करते हैं ? क्यों ?
मैं ईश्वर से प्रार्थना सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले करता हूँ। इसके अलावा, जब मैं किसी संकट या मुश्किल में होता हूँ, तब भी प्रार्थना करता हूँ, क्योंकि ईश्वर ही हमारी रक्षा करता है और मन को शांति प्रदान करता है。
(4) भिन्न-भिन्न धर्म के लोग प्रार्थना करने के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं ?
भिन्न-भिन्न धर्म के लोग प्रार्थना करने के लिए अपने-अपने अलग-अलग धर्म-स्थानों पर जाते हैं। जैसे - हिन्दू मंदिर में, मुसलमान मस्जिद में, ईसाई चर्च (गिरजाघर) में, सिख गुरुद्वारे में, पारसी अगियारी में और जैन देरासर में प्रार्थना करने जाते हैं।

प्र. 3. निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश-क्रम के अनुसार लिखिए : (शब्द: हृदय, मनुष्य, सुख, शांति, मित्र, डॉक्टर, दृष्टि, योद्धा, श्रृंखला, नाविक, और, धन, क्षमता, उज्ज्वल, मंदिर, दूध, स्वर, धरा)
हिन्दी शब्दकोश के नियमानुसार शब्दों का क्रम इस प्रकार होगा:

उज्ज्वल

और

क्षमता (क् + ष)

डॉक्टर

दूध (द + ऊ)

दृष्टि (द + ऋ)

धन

धरा

नाविक

मंदिर (म + अं)

मनुष्य (म + अ)

मित्र (म + इ)

योद्धा

शांति

श्रृंखला (श् + र)

सुख (स + उ)

स्वर (स् + व)

हृदय


प्र. 4. इस चित्र की मदद से एक कविता की रचना कीजिए : (चित्र का अभ्यास करके रचित कविता)
सूरज निकला, हुआ सवेरा, दूर हुआ जग का अँधेरा। चिड़ियाँ गाती हैं मीठे गान, रंग-बिरंगे फूलों से महका जहान। सुंदर-सुंदर यह प्रकृति हमारी, ईश्वर की है यह रचना न्यारी।

प्र. 5. वचन बदलकर वाक्य फिर से लिखिए :
(1) मैंने कविता लिखी।
हमने कविताएँ लिखीं।
(2) यह मेरी किताब है।
ये हमारी किताबें हैं।
(3) इसे लड्डू दे दो।
इन्हें लड्डू दे दो।
स्वाध्याय (पृष्ठ 2 - 3)
प्र. 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) कवि ईश्वर से क्या चाहते हैं ?
कवि चाहते हैं कि ईश्वर लोगों पर अपनी कृपा (बख्शीश) करे। वह सभी पर अपनी दया दृष्टि रखे, सब की खबर रखे और अपनी ताकत से लोगों की हर आफत को टाल दे।
(2) 'तू अपनी नज़र हम पर रखना' ऐसा कवि क्यों कहते हैं ?
कवि ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि यह सारी दुनिया और आसमान उसी ईश्वर का है और हम सब उसी के हैं। उसी की कृपा से हमें यह शरीर और प्राण मिले हैं, इसलिए वह हमारे सुख-दुख में हमारी रक्षा करे और हम पर अपनी नज़र रखे।
(3) कवि किसे सबसे ताकतवाला मानते हैं ? क्यों ?
कवि ईश्वर को सबसे ताकतवाला मानते हैं। क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान है, वह चाहे तो किसी को भी जीवन दे सकता है या मार सकता है, और हर प्रकार के संकट और आफत को टालने की शक्ति सिर्फ उसी में है।
(4) कवि खुद से क्या कहना चाहते हैं ?
कवि खुद से और हम सबसे यह कहना चाहते हैं कि हमें अपना सिर हमेशा ईश्वर के आगे झुकाकर खड़े रहना चाहिए और उसी सर्वशक्तिमान की शरण में रहना चाहिए।

प्र. 2. दिए गए भाव के आधार पर काव्य पंक्तियाँ लिखिए :
(1) हे ईश्वर ! तेरी कृपा से मुझे शरीर और प्राण मिले हैं। चाहे जो भी हो, तुम अपनी कृपा दृष्टि हम पर सदा रखना।
  • तेरी रहमत से हम सबने, ये जिस्म-ओ-जाँ पाए हैं। तू अपनी नजर हम पर रखना किस हाल में हैं, ये खबर रखना।
  • (2) हे प्रभु ! ये सारा संसार तेरा है, तू बड़ा दयालु है। तू हम पर अपनी दया दृष्टि रखना।
तेरी है जमीं, तेरा आसमान, तू बड़ा मेहरबाँ, तू बख्शीश कर। सभी का है तू, सभी तेरे, खुदा मेरे, तू बख्शीश कर।

प्र. 3. अपूर्ण काव्य पूर्ण कीजिए : मेरी प्यारी-प्यारी गाय घर की राज दुलारी गाय
जो भी देखे खुश हो जाए, मीठा-मीठा दूध पिलाए। चारा खाकर रंभाती है, सबके मन को भाती है।

प्र. 4. यह गीत हिन्दी फिल्म 'द बर्निंग ट्रेन' से लिया गया है। तुमने इस प्रकार की और भी प्रार्थनाएँ सुनी होंगी । ऐसी ही कोई और प्रार्थना लिखो जो कि किसी फिल्म में हो।
हाँ, फिल्मों में ऐसी और भी कई प्रार्थनाएँ हैं। फिल्म 'अंकुश' की एक बहुत प्रसिद्ध प्रार्थना इस प्रकार है:

इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना। हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना। (फिल्म - अंकुश)


प्र. 5. इस प्रार्थना को अपनी मातृभाषा में लिखिए। (ગુજરાતી માતૃભાષામાં 'तेरी है जमीं' નો અનુવાદ)
તારી છે જમીન, તારું આસમાન, તું મોટો મહેરબાન, તું બક્ષિસ (કૃપા) કર。 સૌનો છે તું, સૌ તારા છે, ખુદા મારા, તું બક્ષિસ (કૃપા) કર。 તારી મરજીથી હે માલિક, અમે આ દુનિયામાં આવ્યા છીએ。 તારી રહેમતથી (કૃપાથી) અમે સૌએ, આ શરીર અને જીવ (પ્રાણ) મેળવ્યા છે。 તું તારી નજર અમારા પર રાખજે, કયા હાલમાં છીએ, એ ખબર રાખજે。 તું ચાહે તો અમને રાખે, તું ચાહે તો અમને મારે, તારી આગળ ઝુકાવીને માથું, ઊભા છીએ આજે અમે બધા, ઓ સૌથી મોટી તાકાતવાળા, તું ચાહે તો દરેક આફત ટાળે。
भाषा-सज्जता (पृष्ठ 4 - 7)
प्र. 1. उपर्युक्त नियमों के आधार पर निम्नलिखित शब्दों का वचन परिवर्तन कीजिए। (અહીં એકવચનમાંથી બહુવચન અને બહુવચનમાંથી એકવચન કરવાના છે)
  • (1) नदी = नदियाँ
  • (2) किताब = किताबें
  • (3) दरवाजे = दरवाजा
  • (4) कला = कलाएँ
  • (5) कौआ = कौए
  • (6) धातुएँ = धातु
  • (7) सड़कें = सड़क
  • (8) कुत्ता = कुत्ते

प्र. 2. निम्नलिखित उपसर्गों के योग से तीन-तीन शब्द बनाइए :
  • (1) चौ : चौराहा, चौमासा, चौकोर
  • (2) बिन : बिनबात, बिनब्याहा, बिनमाँगे
  • (3) पर : परदेश, परलोक, परोपकार
  • (4) अन : अनपढ़, अनहोनी, अनजान
  • (5) अध : अधपका, अधमरा, अधजला

प्र. 3. निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय ढूँढ़िए : (શબ્દની પાછળ લાગતા પ્રત્યયને અલગ તારવવાના છે)
  • (1) मनुष्यता = ता
  • (2) धनवान = वान
  • (3) रसोइया = इया
  • (4) टोकरी = ई
  • (5) इकहरा = हरा
  • (6) धोखेबाज = बाज
  • (7) बलवती = वती
  • (8) भाग्यवान = वान
योग्यता-विस्तार

भिन्न-भिन्न प्रार्थनाओं का संकलन कीजिए।

(यह छात्रों के लिए संकलन प्रवृत्ति है।) छात्र अपनी उत्तरपुस्तिका या प्रोजेक्ट में निम्नलिखित प्रकार की प्रार्थनाएँ संकलित कर सकते हैं:

वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें।

ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हों हमारे करम।

दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना।

इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना।

02 ईदगाह 2 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 13-14)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) हामिद ने चिमटा ही क्यों खरीदा ?
हामिद की दादी अमीना तवे से रोटियाँ उतारती थीं, तो उनके हाथ जल जाते थे। हामिद को अपनी बूढ़ी दादी का खयाल आया। उसने सोचा कि खिलौने तो मिट्टी के हैं और टूट जाएँगे, लेकिन अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे, तो वे बहुत प्रसन्न होंगी और उनकी उँगलियाँ कभी नहीं जलेंगी। चिमटा घर में हमेशा काम आने वाली चीज़ थी, इसीलिए हामिद ने चिमटा खरीदा।
(2) चिमटा खरीदने के लिए हामिद कौन से कारण बताता है?
चिमटा खरीदने के लिए हामिद अपने दोस्तों को कारण बताता है कि खिलौने मिट्टी के हैं, ज़रा-सा पानी पड़े या हाथ से छूट जाएँ तो वे चूर-चूर हो जाएँगे। लेकिन उसका चिमटा बहादुर शेर है, जो आग में, पानी में, आँधी में और तूफान में बराबर डटा रहेगा। वह यह भी बताता है कि चिमटे को कंधे पर रखने से वह बंदूक बन जाता है, हाथ में लेने से फकीरों का चिमटा बन जाता है, और चाहने पर मंजीरे का काम भी दे सकता है। उसका चिमटा सभी खिलौनों की जान निकाल सकता है।
(3) बूढ़ी अम्मा का क्रोध स्नेह में क्यों बदल गया ?
हामिद ने मेले से खाने-पीने की चीज़ें या खिलौने न लेकर दादी के लिए चिमटा खरीदा था। जब हामिद ने अपराधी भाव से कहा कि "तुम्हारी उँगलियाँ तवे से जल जाती थीं, इसलिए मैंने लिया", तो बूढ़ी अम्मा को यह एहसास हुआ कि बच्चे में कितना त्याग, सद्भाव और विवेक है। दूसरे बच्चों को खिलौने लेते और मिठाई खाते देखकर हामिद का मन ललचाया होगा, फिर भी उसने खुद पर काबू (जब्त) रखा और अपनी दादी के बारे में सोचा। इसी निस्वार्थ प्रेम को देखकर बूढ़ी अम्मा का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल गया।
(4) अब आप चिमटे के प्रयोग की तरह रुमाल के विविध प्रयोग बताइए।
(यह छात्र के विचारने योग्य प्रश्न है, इसका संभावित उत्तर इस प्रकार है:) चिमटे की तरह रुमाल के भी कई विविध प्रयोग हो सकते हैं। जैसे - पसीना पोंछने के लिए, हाथ-मुँह साफ करने के लिए, सर्दी-जुकाम होने पर नाक पोंछने के लिए, चोट लगने पर खून रोकने के लिए पट्टी के रूप में बाँधने के लिए, चिलचिलाती धूप में सिर ढंकने के लिए और कभी-कभी किसी गरम बर्तन को पकड़ने के लिए भी हम रुमाल का प्रयोग कर सकते हैं।

प्र. 2. इस कहानी का शीर्षक 'ईदगाह' ही क्यों रखा गया? इसके अलावा आप कौन-सा शीर्षक देना चाहेंगे? क्यों ?
कहानी का मुख्य प्रसंग ईद के दिन ईदगाह जाने, वहाँ नमाज़ पढ़ने और उसके बाहर लगे मेले में बच्चों द्वारा की गई खरीदारी से जुड़ा है। कहानी के सभी पात्र ईदगाह जाते हैं और हामिद का चिमटा खरीदने का सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय भी ईदगाह के मेले में ही घटित होता है। इसलिए इस कहानी का शीर्षक 'ईदगाह' बिल्कुल उचित है।

इसके अलावा मैं इस कहानी को "हामिद का चिमटा" या "दादी का सच्चा प्रेम" शीर्षक देना चाहूँगा। क्योंकि पूरी कहानी का मुख्य आकर्षण हामिद का त्याग और उसके द्वारा खरीदा गया चिमटा है, जो उसकी दादी के प्रति असीम प्रेम को दर्शाता है।


प्र. 3. निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(1) ऐतिहासिक ग्रंथों में परोपकार के कौन-कौन से उदाहरण मिलते हैं ?
ऐतिहासिक ग्रंथों में महर्षि दधीचि द्वारा मानव कल्याण के लिए अस्थि (शरीर) दान, राजा शिबि द्वारा पंडूक की रक्षा के लिए अंग दान, और महर्षि दयानंद द्वारा अपने प्राण लेने वाले रसोइए जगन्नाथ की प्राण रक्षा करने के परोपकार के उदाहरण मिलते हैं।
(2) ऋषि-मुनियों ने हमें क्या सीख दी है ?
ऋषि-मुनियों ने हमें सीख दी है कि निराश्रितों को आसरा दो, दीन-दुखियों और वृद्धों की शारीरिक और आर्थिक मदद करो, भूखों को भोजन करवाओ, और यदि विद्वान हो तो विद्या का प्रचार कर समाज का उद्धार करो।
(3) देश एवं समाज की उन्नति किस प्रकार होगी ?
यदि सभी लोग अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार परोपकार करते रहें, तो समाज एवं देश की निरंतर उन्नति होती रहेगी।
(4) विलोम शब्द लिखिएः आश्रित, अवनति
  • आश्रित का विलोम - निराश्रित
  • अवनति का विलोम - उन्नति
  • (5) परिच्छेद के आधार पर अपने साथियों से पूछने के लिए तीन प्रश्न बनाइए।
  • १. दधीचि ने अपना शरीर क्यों त्याग दिया था?
  • २. वर्तमान में सामाजिक संस्थाएँ देश के लिए क्या कर रही हैं?
  • ३. मनुष्य जीवन को किस भावना के बिना निरर्थक माना गया है?
  • (6) इस परिच्छेद को उचित शीर्षक दीजिए।
इस परिच्छेद का उचित शीर्षक "परोपकार का महत्त्व" या "सच्चा परोपकार" हो सकता है।

प्र. 4. तुम भी हामिद की तरह किसी न किसी मेले में गए होगे, वहाँ तुमने क्या-क्या खरीदा और क्यों ?
(यह विद्यार्थी की स्व-प्रवृत्ति है, उत्तर का उदाहरण:) हाँ, मैं भी अपने शहर में लगने वाले नवरात्रि के मेले में गया था। वहाँ मैंने अपने लिए एक लकड़ी की बाँसुरी और अपनी छोटी बहन के लिए एक सुंदर गुड़िया खरीदी थी। मुझे संगीत का बहुत शौक है, इसलिए मैंने बाँसुरी ली और मेरी बहन को खिलौने बहुत पसंद हैं, इसलिए मैंने उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए गुड़िया खरीदी।

प्र. 5. यदि तुम्हें मेले से अपनी दादी के लिए कुछ खरीदना हो तो क्या खरीदोगे और क्यों ?
(यह विद्यार्थी की स्व-प्रवृत्ति है, उत्तर का उदाहरण:) यदि मुझे मेले से अपनी दादी के लिए कुछ खरीदना हो, तो मैं उनके लिए धार्मिक पुस्तकें (जैसे रामायण या भगवद्गीता) और एक अच्छी सी छतरी खरीदूँगा। धार्मिक पुस्तकों का पाठ करने से उन्हें आत्मिक शांति मिलेगी, और छतरी उन्हें धूप और बारिश में मंदिर आते-जाते समय बचाएगी।
स्वाध्याय (पृष्ठ 14-15)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) रोजे के दिन मुसलमान क्या करते हैं ?
रमजान के पवित्र महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं। वे पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करते हैं, उपवास करते हैं और खुदा (अल्लाह) की इबादत करते हैं।
(2) रमजान ईद के दिन मुसलमान लोग कहाँ जाते हैं ?
रमजान के पूरे तीस रोज़ों के बाद जब ईद आती है, तब मुसलमान लोग नमाज़ पढ़ने और एक-दूसरे के गले मिलने के लिए 'ईदगाह' जाते हैं।
(3) दुकानों में कौन-कौन से खिलौने मिल रहे थे?
मेले में दुकानों पर तरह-तरह के मिट्टी के खिलौने मिल रहे थे, जैसे - खाकी वर्दी और लाल पगड़ी वाला सिपाही, गुजरिया, राजा, काले चोगे वाला वकील, भिश्ती, और धोबिन।

प्र. 2. पेन्सिल में लिखित शब्दों के समानार्थी और विरोधी शब्द लिखिए :
  • शीतल: समानार्थी - ठंडा, ठंढा ; विरोधी - उष्ण, गर्म
  • प्रसन्न: समानार्थी - खुश, आनंदित ; विरोधी - अप्रसन्न, उदास, खिन्न
  • गरीब: समानार्थी - दरिद्र, निर्धन ; विरोधी - अमीर, धनवान
  • अंधकार: समानार्थी - अँधेरा, तम ; विरोधी - प्रकाश, उजाला
  • स्नेह: समानार्थी - प्रेम, प्यार ; विरोधी - नफरत, घृणा
  • पुरानी: समानार्थी - प्राचीन, प्राक्तन ; विरोधी - नई, नवीन

प्र. 3. मुहावरों का अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
  • (1) बेड़ा पार लगाना: (अर्थ - किनारे ले जाना, संकट से बचाना)
  • वाक्य प्रयोग: भगवान ही गरीबों और बेसहारा लोगों का बेड़ा पार लगाते हैं।
  • (2) बाल बाँका न होना: (अर्थ - जरा भी नुकसान न होना)
  • वाक्य प्रयोग: मेरे बहादुर चिमटे का तुम्हारे खिलौने बाल भी बाँका नहीं कर सकते।
  • (3) छाती पीट लेना: (अर्थ - दुःख प्रकट करना)
  • वाक्य प्रयोग: मेले से भूखे-प्यासे हामिद को चिमटा लाते देखकर दादी अमीना ने अपनी छाती पीट ली।
  • (4) दिल चीरना: (अर्थ - बहुत दुःख पहुँचाना या मर्माहत करना) (पाठ में 'दिल कचोटना' का अर्थ कुछ न पाने पर दुःख होना है)
  • वाक्य प्रयोग: बेटे की बुरी बातों ने बूढ़े पिता का दिल चीर दिया।

प्र. 4. रूपरेखा के आधार पर कहानी पूर्ण कीजिए : (एक नगर में दो स्त्रियाँ - एक ही बालक के लिए दावेदार - आपस में तकरार...)

कहानी का शीर्षक : असली माँ (सच्चा न्याय)

एक नगर में दो स्त्रियाँ रहती थीं। एक दिन उन दोनों के बीच एक छोटे से बालक को लेकर गहरा विवाद हो गया। दोनों ही स्त्रियाँ उस बच्चे पर अपना-अपना दावा कर रही थीं और कह रही थीं कि "यह बच्चा मेरा है।" जब आपस में उनकी तकरार बहुत बढ़ गई, तो मामले को सुलझाने के लिए वे दोनों न्यायाधीश के समक्ष पहुँचीं।

न्यायाधीश ने दोनों स्त्रियों की बातें बहुत ध्यान से सुनीं, लेकिन यह तय करना मुश्किल था कि असली माँ कौन है। अंत में न्यायाधीश ने न्याय करने के लिए एक तरकीब सोची। उन्होंने अपने सिपाही से कहा, "इस बालक के दो टुकड़े कर दो और दोनों स्त्रियों में आधा-आधा बाँट लो।"

यह कठोर बात सुनकर झूठा दावा करने वाली एक स्त्री मौन रही, उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। परंतु दूसरी स्त्री फूट-फूटकर रोने लगी और न्यायाधीश से हाथ जोड़कर कहने लगी, "महाराज! कृपया बच्चे को न काटें, उसे उसी स्त्री को दे दें। कम से कम मेरा बच्चा ज़िंदा तो रहेगा।"

न्यायाधीश को तुरंत पता चल गया कि असली माँ कौन है, क्योंकि एक सच्ची माँ अपने बच्चे की जान जाते नहीं देख सकती। न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया और रोती हुई स्त्री को उसका बालक सौंप दिया।

सीख: सत्य की हमेशा जीत होती है और माँ का प्रेम अतुलनीय होता है।

प्र. 5. निम्नलिखित अपूर्ण कहानी को अपने शब्दों में पूर्ण कीजिए : (मौसम में ठंडक बढ़ने लगी थी। माँ सोचने लगी कि इस साल ढेर सारे स्वेटर बनाकर बेचने हैं जिससे अंकित की दसवीं कक्षा की फीस और पढ़ाई का खर्चा निकाला जा सके। अंकित के पापा नहीं थे। एक बड़ी बहन थी। अंकित अपने घर में समृद्धि लाने के लिए प्रतिदिन सोचता रहता है...)
...कि वह अपनी माँ और बहन की मदद कैसे करे। एक दिन उसने निश्चय किया कि वह स्कूल के बाद अपने खाली समय का उपयोग करेगा। अगले ही दिन से उसने सुबह-सुबह अखबार बाँटने का काम शुरू कर दिया। वह सुबह जल्दी उठता और अपनी पुरानी साइकिल पर पूरे मोहल्ले में अखबार पहुँचाकर आता。

दूसरी तरफ, उसकी बड़ी बहन ने भी घर पर छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर माँ का हाथ बँटाना शुरू कर दिया। अंकित और उसकी बहन की यह मेहनत और लगन देखकर माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। परिवार के तीनों सदस्यों की मेहनत रंग लाई。

कुछ महीनों बाद जब अंकित की दसवीं कक्षा का परिणाम आया, तो उसने पूरे शहर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसकी इस सफलता पर सरकार की ओर से उसे आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिल गई। अब माँ को उसकी फीस की कोई चिंता नहीं थी। अपने अथक परिश्रम और सूझबूझ से अंकित ने घर में फिर से सुख और समृद्धि ला दी थी।

03 अंतरिक्ष परी सुनीता विलियम्स 4 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 20)
प्र. 1. प्रश्नों के मौखिक उत्तर दीजिए :
(1) सुनीता को पूरे विश्व की बेटी क्यों कहा गया है ?
अंतरिक्ष किसी एक देश का नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व और मानव जाति का है। सुनीता विलियम्स एक अमरीकी नागरिक हैं, परंतु उनके पिता दीपकभाई पंड्या मूल रूप से भारत (गुजरात) के हैं। सुनीता ने अंतरिक्ष में जाकर जो ऐतिहासिक सफलताएँ प्राप्त कीं, वे किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए गर्व का विषय हैं। इसीलिए, उनकी इस सार्वभौमिक उपलब्धि के कारण सुनीता को पूरे विश्व की बेटी कहा गया है।
(2) 'महिलाएँ विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर सकी हैं, आपका क्या मत है?'
मेरा यह दृढ़ मत है कि आज महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। वे उच्च-से-उच्च पदों पर आसीन हैं और उन्होंने परंपराओं की बेड़ियों को तोड़कर अपने अस्तित्व को साकार किया है। विज्ञान, शिक्षा, खेल, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे कठिन क्षेत्रों में सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने अपनी क्षमता साबित करके देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है।
(3) 'कड़ी मेहनत, दृढ़ निश्चय और प्रतिभा के बल पर व्यक्ति अपनी मंजिल पा सकता है।' चर्चा कीजिए।
(छात्रों के लिए चर्चा का संभावित उत्तर) यह कथन बिल्कुल सत्य है। सफलता कभी आसानी से नहीं मिलती। सुनीता विलियम्स ने बचपन में अंतरिक्ष यात्री बनने का जो संकल्प लिया था, उसे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय से साकार किया। गोताखोरी, हेलीकॉप्टर उड़ाना और नासा का आठ साल का कड़ा प्रशिक्षण - यह सब उनकी प्रतिभा और अथक परिश्रम का ही परिणाम था। इसी लगन के कारण वे अंतरिक्ष यात्रा रूपी अपनी मंजिल पा सकीं।
(4) आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं ? क्यों ?
(यह छात्र के स्व-विचार का प्रश्न है, यहाँ एक आदर्श उत्तर प्रस्तुत है) मैं बड़े होकर एक वैज्ञानिक बनना चाहता हूँ। क्योंकि मुझे ब्रह्मांड के रहस्यों, नई तकनीकों और अंतरिक्ष के बारे में जानने की बहुत उत्सुकता है। मैं विज्ञान के क्षेत्र में नए-नए आविष्कार करके अपने देश भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना चाहता हूँ और मानवता की भलाई के लिए अपना योगदान देना चाहता हूँ।
स्वाध्याय (पृष्ठ 20 - 21)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) सुनीता कितने समय तक अंतरिक्ष में रहकर लौटी ?
सुनीता विलियम्स 194 दिन, 18 घंटे और 58 मिनट तक अंतरिक्ष में रहकर पृथ्वी पर वापस लौटीं।
(2) सुनीता ने अंतरिक्ष में कितने प्रकार का रिकॉर्ड बनाया ?
सुनीता ने अंतरिक्ष में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए:
  • १. उन्होंने 29 घंटे 17 मिनट तक स्पेसवॉक करके एक नया अंतरिक्ष रिकॉर्ड बनाया।
  • २. वे अंतरिक्ष के बोस्टन मैराथन में साढ़े चार घंटे में 42 किलोमीटर का सफर तय करने वाली प्रथम अंतरिक्षयात्री बनीं।
  • ३. अंतरिक्ष में 188 दिन और चार घंटे रहने का शैनोन ल्यूसिक का पुराना रिकॉर्ड भी सुनीता ने तोड़ा।
(3) अंतरिक्ष परी सुनीता विलियम्स के अलावा हमारे देश के अंतरिक्षयात्री कौन-कौन हैं ?
अंतरिक्ष परी सुनीता विलियम्स के अलावा हमारे देश के अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा (प्रथम भारतीय अंतरिक्षयात्री) और कल्पना चावला (प्रथम महिला अंतरिक्षयात्री) हैं।
(4) हमें किस बात का गर्व है ?
हमें इस बात का अत्यंत गर्व है कि अंतरिक्ष में अपना अस्तित्व स्थापित करने वाली सुनीता विलियम्स का मूल भारत (गुजरात) से जुड़ा है। उनके पिता दीपकभाई पंड्या गुजराती हैं, इसलिए सुनीता का भारतीय और गुजराती होना हमारे लिए बहुत बड़े गर्व की बात है।
(5) सुनीता ने अपने सपने कैसे साकार किए ?
छः साल की उम्र में नील आर्मस्ट्रांग को चाँद पर उतरते देखकर सुनीता ने कुछ अलग कर दिखाने का निश्चय किया था। उन्होंने नेवल अकादमी से उच्च शिक्षा प्राप्त की, व्यावसायिक अनुभव लिया और नासा (NASA) में चयनित हुईं। आठ साल तक कठोर शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने बचपन के संकल्प को मेहनत से साकार किया।
(6) अंतरिक्ष यात्रा में किस प्रकार की मुश्किलें आती हैं ?
अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन में जिंदगी बहुत कठिन होती है। वहाँ खाने से लेकर नहाने तक में दिक्कतें आती हैं। गुरुत्वाकर्षण (भारहीनता) न होने के कारण शरीर का लचीलापन तेजी से खत्म होता है, मांसपेशियाँ और हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। रोज डिब्बाबंद भोजन खाना पड़ता है और वहाँ सोना भी बहुत मुश्किल होता है।

प्र. 2. अंदाज अपना-अपना... (वाक्यों का कारण स्पष्ट कीजिए)
(1) अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उत्तेजना थी...
...क्योंकि 20 सितम्बर, 2007 को गुजरात का गौरव, भारत की शान और पूरे विश्व की बेटी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अमरीका से हवाई जहाज द्वारा अहमदाबाद आ रही थीं।
(2) हमें नारी का सम्मान करना चाहिए...
...क्योंकि आज महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। वे अपनी प्रतिभा, मेहनत और क्षमता से पुरानी परंपराओं की बेड़ियों को तोड़कर हर सर्वोच्च पद पर पहुँच रही हैं और दुनिया में देश का नाम रोशन कर रही हैं।
(3) सुनीता पंड्या सुनीता विलियम्स बनी...
...क्योंकि सुनीता ने अपने एक खास मित्र और सहाध्यायी (सहपाठी) माइकल विलियम्स से शादी की, जिसके बाद उनका उपनाम बदल गया और वे सुनीता पंड्या से सुनीता विलियम्स बन गईं।
(4) कल्पना चावला हमारी कल्पना बन गई...
...क्योंकि भारत की प्रथम महिला अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गईं और अपने हौसले की बुलंदी को छूकर सदा के लिए एक प्रेरणादायक याद (कल्पना) बन कर रह गईं।

प्र. 3. पात्रों का परिचय दीजिए :
  • (1) इंदिरा गांधी: ये स्वतंत्र भारत की प्रथम और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री थीं। इन्हें 'आयरन लेडी' (लौह महिला) के नाम से जाना जाता है।
  • (2) सानिया मिर्जा: ये भारत की एक बहुत ही प्रसिद्ध और सफल महिला टेनिस खिलाड़ी हैं। इन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई खिताब जीते हैं।
  • (3) किरण बेदी: ये भारत की प्रथम महिला आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं। इन्होंने पुलिस सेवा और तिहाड़ जेल के सुधारों में बड़ा योगदान दिया है।
  • (4) मल्लिका साराभाई: ये भारत की एक सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना (भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी) और समाज सेविका हैं। ये अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की पुत्री हैं।
  • (5) कल्पना चावला: ये अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की प्रथम महिला अंतरिक्षयात्री थीं, जिनका शटल दुर्घटना में निधन हो गया था।
  • (6) पी. टी. ऊषा: ये भारत की एक महान महिला धाविका (एथलीट) हैं। इन्हें दौड़ में अपनी गति के कारण 'पय्योली एक्सप्रेस' और 'उड़नपरी' भी कहा जाता है।

प्र. 4. चित्र के आधार पर काव्य लिखिए : (चित्र के आधार पर रचित काव्य : गुड़हल/जासूद का फूल)
लाल-लाल यह प्यारा फूल, सबके मन को भाता है। दो हरी पत्तियों के बीच खिला, प्रकृति की शान बढ़ाता है। गुड़हल है इस फूल का नाम, ईश्वर की पूजा में आता काम। कोमल-कोमल पंखुड़ियाँ इसकी, सुंदरता का यह है धाम।

प्र. 5. परिच्छेद का शुद्ध रूप से अनुलेखन कीजिए :
"कुछ नया करने की लगन और उत्साह हो तो लक्ष्य तक पहुँचने से कोई रोक नहीं सकता। बचपन से ही सितारों की सैर का सपना देखनेवाली कल्पना अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के बाद चाँद पर उतरना चाहती थी। बचपन से ही उसके मन में अंतरिक्ष यात्री बनने की धुन सवार थी। एक बातचीत में कल्पना ने कहा था, 'मैं बचपन से जिस क्षेत्र में जाना चाहती थी, वहाँ पहुँचने के लिए मैंने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया।'"
भाषा-सज्जता (पृष्ठ 22)

• उपर्युक्त उदाहरणों के आधार पर निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए : (साधु, कुतिया, युवक, पुत्र, पड़ोसिन, बाघ, ठाकुर, सन्यासी, सम्राट, वर)

  • (1) साधु का स्त्रीलिंग - साध्वी
  • (2) कुतिया का पुल्लिंग - कुत्ता
  • (3) युवक का स्त्रीलिंग - युवती
  • (4) पुत्र का स्त्रीलिंग - पुत्री
  • (5) पड़ोसिन का पुल्लिंग - पड़ोसी
  • (6) बाघ का स्त्रीलिंग - बाघिन
  • (7) ठाकुर का स्त्रीलिंग - ठकुराइन
  • (8) सन्यासी का स्त्रीलिंग - सन्यासिनी
  • (9) सम्राट का स्त्रीलिंग - साम्राज्ञी
  • (10) वर का स्त्रीलिंग - वधू
योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 22 - प्रवृत्तियाँ)
(1) अपनी लाइब्रेरी में से पुस्तक लेकर अन्य अंतरिक्षयात्रियों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।
(छात्रों के लिए प्रवृत्ति का आलेख) अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में कई महान यात्री हुए हैं। यूरी गागरिन (रूस) दुनिया के पहले व्यक्ति थे जो 1961 में अंतरिक्ष में गए। नील आर्मस्ट्रॉन्ग (अमरीका) चाँद की सतह पर कदम रखने वाले पहले इंसान थे। राकेश शर्मा 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे।
(2) तुम्हारे आसपास भी ऐसी कई महिलाएँ होंगी जिन्होंने किसी न किसी क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया होगा। उनके बारे में पता करें और लिखें।
(छात्र के परिवेश आधारित संभावित उत्तर) हमारे शहर में 'सरिता बहन' नाम की एक महिला हैं, जो एक साधारण परिवार से आती हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उच्च शिक्षा प्राप्त की और आज वे एक बहुत सफल डॉक्टर (सर्जन) बनकर गरीब लोगों का मुफ्त इलाज कर रही हैं। समाज सेवा के इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें राज्य सरकार द्वारा कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणादायक है।
(3) लाइब्रेरी से निम्नलिखित वैज्ञानिक जैसे कि जगदीश चन्द्र बोस, अब्दुल कलाम, डॉ. सी.वी.रामन, मेडम क्युरी, साम पित्रोडा के बारे में जानकारी संकलित करके उसे छात्रों को सुनाइए और विस्तार से समझाइए।
(कक्षा-प्रवृत्ति के लिए संकलन)
(1) जगदीश चन्द्र बोस: इन्होंने रेडियो तरंगों और माइक्रोवेव का आविष्कार किया और दुनिया को पहली बार सिद्ध करके दिखाया कि पेड़-पौधों में भी जीवन (जान) होता है।
(2) अब्दुल कलाम: डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को भारत का 'मिसाइल मैन' कहा जाता है। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति थे और उन्होंने देश के रक्षा तथा अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अमूल्य योगदान दिया।
(3) डॉ. सी. वी. रामन: इन्होंने प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of light) पर गहरा शोध किया, जिसे 'रामन प्रभाव' (Raman Effect) के नाम से जाना जाता है। इसके लिए उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था।
(4) मैडम क्यूरी: इन्होंने रेडियोएक्टिविटी की खोज की और रेडियम तथा पोलोनियम जैसे तत्वों का पता लगाया। ये विज्ञान की दो अलग-अलग शाखाओं (भौतिकी और रसायन) में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली दुनिया की एकमात्र महिला हैं।
(5) साम पित्रोडा: इन्हें भारत में 'दूरसंचार क्रांति' (Telecom Revolution) का जनक माना जाता है। इन्होंने भारत में टेलीफोन और संचार व्यवस्था को आधुनिक बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।
04 उठो, धरा के अमर सपूतों 4 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 24)
प्र. 1. आशय स्पष्ट कीजिए : "युग-युग के मुरझे सुमनों में नयी-नयी मुस्कान भरो। उठो धरा के अमर सपूतों, पुनः नया निर्माण करो ॥"
इन पंक्तियों का आशय यह है कि सदियों से जो फूल (देशवासी) मुरझाए हुए हैं, अर्थात् जो लोग लंबे समय से गुलामी, दुख और निराशा में डूबे हुए हैं, उनके चेहरों पर नई आशा और खुशी की मुस्कान भरनी है। कवि देश के वीर सपूतों से कहते हैं कि वे अपने अच्छे कार्यों से देशवासियों के मन में नया उत्साह जगाएं और देश का नवनिर्माण करें।

प्र. 2. कवि ने देश के सपूतों को क्या संदेश दिया है ?
कवि ने देश के सपूतों को यह संदेश दिया है कि वे अज्ञान, आलस्य और निराशा को त्याग कर देश के नवनिर्माण में जुट जाएं। वे लोगों के जीवन में नया उत्साह, नई आशा और नया प्राण भरें तथा अपने ज्ञान और कर्म से देश का भविष्य उज्ज्वल बनाएं।

प्र. 3. हमारी राष्ट्रीय संपत्ति कौन-कौन सी है ? उसकी सुरक्षा के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं ?
रेल, तार, डाकघर, राष्ट्रीय राजमार्ग, नदियाँ, जंगल, ऐतिहासिक इमारतें और सार्वजनिक बगीचे आदि हमारी राष्ट्रीय संपत्ति हैं। इनकी सुरक्षा के लिए हम कभी किसी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाएंगे। हम इनका सही उपयोग करेंगे, स्वच्छता बनाए रखेंगे और यदि कोई इन्हें नुकसान पहुँचा रहा हो, तो उसे रोकेंगे या संबंधित अधिकारियों को सूचित करेंगे।
स्वाध्याय (पृष्ठ 24 - 26)
प्र. 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) कवि माहेश्वरीजी धरा के अमर सपूतों से क्या चाहते हैं ?
कवि माहेश्वरीजी धरा के अमर सपूतों से चाहते हैं कि वे अज्ञान और निराशा के अंधकार को दूर करके देश में नया ज्ञान, नया उत्साह और नया प्राण भरें। वे युग-युग के मुरझाए हुए लोगों के चेहरों पर नई मुस्कान लाएं और नवयुग की नूतन वीणा में नया राग और गान भरकर देश का नवनिर्माण करें।
(2) कवि नई मुस्कान कहाँ देखना चाहते हैं ?
कवि नई मुस्कान युग-युग के मुरझे हुए सुमनों में, अर्थात् उन देशवासियों के चेहरों पर देखना चाहते हैं जो लंबे समय से दुख और निराशा का जीवन जी रहे हैं।
(3) देश के नवनिर्माण के लिए आप क्या-क्या करना चाहेंगे?
देश के नवनिर्माण के लिए मैं खूब पढ़ाई करूँगा और एक आदर्श नागरिक बनूँगा। मैं अपने देश से प्रेम करूँगा और इसकी उन्नति के लिए हर संभव प्रयास करूँगा। मैं समाज से बुराइयों को दूर करने और लोगों में एकता तथा भाइचारा बढ़ाने का कार्य करूँगा।
(4) इस कविता में कौन-सी बातें हैं, जिन्हें तुम अपने जीवन में उतारना चाहोगे ?
इस कविता से मैं देशभक्ति, साहस, उत्साह, निरंतर परिश्रम और निस्वार्थ सेवा जैसी बातों को अपने जीवन में उतारना चाहूँगा। मैं चाहूँगा कि मैं भी अपनी धरती का एक अमर सपूत बनूँ और अपने कार्यों से समाज और देश का नाम रोशन करूँ。

प्र. 2. दिए गए काव्य को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (काव्य: खड़ा हिमालय बता रहा है...)
(1) हिमालय हमें क्या संदेश देता है ?
हिमालय हमें यह संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में आने वाली आंधी, पानी और तूफानों (कठिनाइयों) से डरे बिना अपने रास्ते (लक्ष्य) पर डटे रहना चाहिए।
(2) मुसीबत आने पर हमें क्या करना चाहिए?
मुसीबत आने पर हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने मार्ग पर अटल रहकर मुसीबतों का डटकर सामना करना चाहिए।
(3) कवि ने हिमालय को सबसे बड़ा क्यों कहा है ?
कवि ने हिमालय को सबसे बड़ा इसलिए कहा है क्योंकि उसने अपने जीवन में आई हर बाधा और तूफान का डटकर सामना किया और वह कभी अपने पथ से नहीं हिला।
(4) इस काव्य का भावार्थ लिखिए।
इस काव्य का भावार्थ यह है कि जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मुसीबतों से घबराए बिना अपने मार्ग पर अटल रहता है, उसे जीवन में निश्चित रूप से सफलता मिलती है। बाधाओं से लड़कर ही मनुष्य महान बन सकता है।
(5) इस काव्य को योग्य शीर्षक दीजिए।
इस काव्य का योग्य शीर्षक "अटल हिमालय" या "हिमालय का संदेश" हो सकता है।

प्र. 3. चित्र के आधार पर कविता लिखिए, जिसमें निम्नलिखित शब्दों का उपयोग हुआ हो : (शब्द: फूल, तितली, बादल, वृक्ष, बारिश)
(स्व-रचित कविता)

काले-काले बादल छाए, रिमझिम-रिमझिम बारिश लाए। हरे-भरे सब वृक्ष नहाए, सुंदर-सुंदर फूल खिलाए। रंग-बिरंगी तितली उड़ती, खुशी से यह प्रकृति है झूमती।


प्र. 4. अपूर्ण काव्य को पूर्ण कीजिए : माँ खादी की चद्दर दे दो, मैं गाँधी बन जाऊँगा.....
घड़ी कमर में मैं लटकाऊँ, आँखों पर चश्मा लगाऊँ। हाथ में लाठी लेकर मैं, सत्य-अहिंसा का पाठ पढ़ाऊँगा।
भाषा-सज्जता (पृष्ठ 26 - 27)

• निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा ढूँढ़कर उसका भेद बताइए।

(1) सोना कीमती धातु है।
सोना (द्रव्यवाचक संज्ञा), धातु (जातिवाचक संज्ञा)
(2) गंगा पवित्र नदी है।
गंगा (व्यक्तिवाचक संज्ञा), नदी (जातिवाचक संज्ञा)
(3) उमंग दौड़ रहा है।
उमंग (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
(4) दल जा रहा है।
दल (समूहवाचक संज्ञा)
(5) राजेश भय के कारण जंगल में नहीं गया।
राजेश (व्यक्तिवाचक संज्ञा), भय (भाववाचक संज्ञा), जंगल (जातिवाचक संज्ञा)

• निम्नलिखित एकवचन वाक्य को बहुवचन में परिवर्तित कीजिए :

(1) मुझे लुटेरे का डर था।
हमें लुटेरों का डर था।
(2) पक्षी ने उड़ान भरी।
पक्षियों ने उड़ानें भरीं।
(3) उसने मुझे मिठाई दी।
उन्होंने हमें मिठाइयाँ दीं।

• निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित भाववाचक संज्ञाओं को जातिवाचक संज्ञा में परिवर्तित करके वाक्य फिर से लिखिए :

(1) विज्ञान ने दूरी को कम किया है। (यहाँ 'दूरी' भाववाचक है)
विज्ञान ने दूरियाँ कम की हैं।
(2) नदी की लम्बाई अधिक है। (यहाँ 'लम्बाई' भाववाचक है)
नदियों की लम्बाइयाँ अधिक हैं।
योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 27)

• शिक्षक की मदद से प्रकृति के तत्त्वों पर आधारित काव्यों का संकलन कीजिए।

(यह छात्रों के लिए संकलन प्रवृत्ति है, उदाहरणस्वरूप एक काव्य नीचे दिया गया है:)

प्रकृति की सुंदरता निराली, हर डाली पर छाई हरियाली। नदियाँ कल-कल करती बहतीं, पर्वत शिखरों से ये कहतीं। सूरज, चाँद और ये तारे, लगते हमको बहुत ही प्यारे।

05 सवाल बालमन के, जवाब डॉ. कलाम के 5 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 32)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) यदि आप इन प्रश्नकर्ताओं में होते तो आप कौन-कौन से प्रश्न पूछते ?
(यह छात्र के विचारने योग्य प्रश्न है, इसका संभावित उत्तर इस प्रकार है:) यदि मैं इन प्रश्नकर्ताओं में होता, तो मैं डॉ. कलाम से निम्नलिखित प्रश्न पूछता:
  • १. "सर, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का भविष्य कैसा है?"
  • २. "विद्यार्थी जीवन में मिलने वाली असफलता और निराशा से कैसे निपटना चाहिए?"
(2) डॉ. कलाम ने अपने बचपन की कौन-सी यादगार घटना सुनाई ?
डॉ. कलाम ने अपने पाँचवीं कक्षा के शिक्षक श्री शिवसुब्रह्मण्य अय्यर से जुड़ी एक घटना सुनाई। एक दिन कक्षा में वे समझा रहे थे कि पक्षी कैसे उड़ता है। उन्होंने छात्रों को रामेश्वरम के समुद्र तट पर ले जाकर पक्षियों के उड़ने का जीवंत उदाहरण दिया। यह घटना डॉ. कलाम के मन-मस्तिष्क में हमेशा के लिए बैठ गई और इसी से उन्हें विज्ञान पढ़ने की प्रेरणा मिली।
(3) आपकी यादगार घटना बताइए।
(छात्र अपनी स्व-अनुभूति लिख सकते हैं, यहाँ एक उदाहरण है:) मेरी यादगार घटना वह है जब मैंने पहली बार साइकिल चलाना सीखा था। कई बार गिरने और चोट लगने के बाद, जब एक दिन मैंने बिना किसी सहारे के खुद साइकिल चलाई, तो वह खुशी और जीत का अहसास मेरे लिए जीवन की सबसे अविस्मरणीय घटना बन गया।
(4) अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आप क्या-क्या करते हैं ?
अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मैं जी-तोड़ मेहनत करता हूँ। मैं नियमित रूप से मन लगाकर पढ़ाई करता हूँ, समय का सदुपयोग करता हूँ, नई-नई जानकारियाँ (ज्ञान) अर्जित करता हूँ और मार्ग में आने वाली किसी भी बाधा या कठिनाई का साहसपूर्वक सामना करता हूँ।
(5) किसी को मुसीबत में देखकर आप क्या करते हैं ?
किसी को मुसीबत में देखकर मैं तुरंत उसकी मदद करने का प्रयास करता हूँ। यदि कोई दुर्घटना हो जाए, तो मैं बड़ों को बुलाता हूँ, प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करता हूँ और आवश्यकता पड़ने पर एम्बुलेंस या पुलिस को भी सूचित करता हूँ। अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों को संकट से बचाना ही मेरा कर्तव्य है।

प्र. 2. परिच्छेद को शुद्ध रूप से पढ़िए और सुंदर अक्षरों में लिखिए :
(यह छात्रों के लिए अनुलेखन का कार्य है। छात्रों को अपनी कॉपी में इसे बिना किसी भूल के सुंदर अक्षरों में लिखना है:)

"व्यायाम करते समय कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए। प्रातःकाल शौचादि से निवृत्त होकर, खाली पेट व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम के समय शरीर के सभी अंग-प्रत्यंग प्रभावित होने चाहिए; अन्यथा अंगों की सुड़ौलता एवं शक्ति में असंतुलन आ जाता है। श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया व्यायाम के अनुसार ध्यानपूर्वक करनी चाहिए किन्तु यदि श्वास फूलने लगे तो तत्काल व्यायाम बन्द कर देना चाहिए। व्यायाम में नियमितता का होना अत्यंत आवश्यक है।"


प्र. 3. बचपन में हमें किस भाषा को प्रमुखता देनी चाहिए? मातृभाषा या अंग्रेजी? क्यों ?
डॉ. कलाम के अनुसार बचपन में हमें 'मातृभाषा' को प्रमुखता देनी चाहिए। क्योंकि युवा अपनी मातृभाषा में ही सोचता है और उसी में अपनी बात सहजता से कहने में सबसे अधिक सक्षम होता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर संपर्क के लिए अंग्रेजी जैसी एक संपर्क भाषा का ज्ञान होना भी नितांत आवश्यक है।

प्र. 4. अनुमान लगाओ तुम 2020 में हो। अपने आस-पास क्या देख रहे हो? अपने विचार प्रस्तुत कीजिए ।
(कल्पना आधारित उत्तर) अनुमान के अनुसार, मैं देख रहा हूँ कि भारत एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बन गया है। चारों ओर पक्की सड़कें, उन्नत तकनीक, और हर घर में बिजली तथा शिक्षा की सुविधा है। देश के युवा बड़े-बड़े उद्योगों में रोज़गार प्राप्त कर रहे हैं, गरीबी खत्म हो रही है और सभी देशवासियों के चेहरे पर मुस्कान है। हमारा देश अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया है।
स्वाध्याय (पृष्ठ 32-33)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) पढ़े हुए से देखा हुआ ज्यादा याद रह जाता है ? क्यों ?
पढ़े हुए से देखा हुआ ज्यादा याद रह जाता है, क्योंकि जब हम किसी चीज़ को प्रत्यक्ष रूप से (जीवंत रूप में) अपनी आँखों से देखते हैं, तो उसका चित्र हमारे मन-मस्तिष्क पर गहराई से छप जाता है। जैसा कि डॉ. कलाम के साथ समुद्र तट पर पक्षियों के उड़ने के जीवंत उदाहरण को देखकर हुआ था।
(2) भाषा के विषय में डॉ. कलाम ने क्या बताया ?
भाषा के विषय में डॉ. कलाम ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा और कॉलेज तक की पढ़ाई मातृभाषा में की जा सकती है, क्योंकि व्यक्ति अपनी मातृभाषा में ही सोचता है। परंतु, वैश्विक स्तर पर दुनिया से संपर्क स्थापित करने के लिए अंग्रेजी जैसी संपर्क भाषा का ज्ञान होना भी बहुत आवश्यक है।
(3) चिराग जैन ने डॉ. कलाम से क्या पूछा?
चिराग जैन ने डॉ. कलाम से पूछा था: "वह कौन-सी बड़ी चुनौती है, जिसका सामना हमें आज करना पड़ रहा है ?"
(4) राष्ट्र विकास में महिलाओं का क्या योगदान है ?
राष्ट्र विकास (विज़न 2020) में महिलाओं का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान है। सशस्त्र सेनाओं में भी महिलाओं की नियुक्ति बिना किसी भेदभाव के होती है। महिलाएँ राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं में वृद्धि के लिए उच्च स्तरीय सामरिक उपकरणों पर कार्य करके अपना पूरा सहयोग दे रही हैं और हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
(5) किसी भी देश के लिए सेना का क्या महत्त्व है ?
किसी भी देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता बनाए रखने के लिए सेना का अत्यधिक महत्त्व है। सेना ही बाहरी आक्रमणों से देश की रक्षा करती है, सीमाओं को सुरक्षित रखती है और देश के भीतर किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय नागरिकों की जान बचाकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाती है।

प्र. 2. मुहावरों का अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
  • (1) जी-तोड़ मेहनत करना: (अर्थ - बहुत अधिक परिश्रम करना)
  • वाक्य प्रयोग: परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए रमेश ने जी-तोड़ मेहनत की।
  • (2) महारत हासिल करना: (अर्थ - योग्यता, निपुणता या विशेषज्ञता प्राप्त करना)
  • वाक्य प्रयोग: जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं और कठिनाइयों को पराजित करने में महारत हासिल करनी होगी।

प्र. 3. रूपरेखा के आधार पर कहानी लिखिए : (एक ब्राह्मण स्त्री – नेवला पालना – पानी भरने के लिए बाहर जाना – लौटने पर नेवले का मुँह खून से सना देखना – बच्चे की हत्या की शंका – नेवले पर घड़ा पटकना – बच्चे को जिन्दा पाना – पास ही मरा हुआ साँप पाना – पछतावा – सीख ।)

कहानी का शीर्षक : नेवले की वफादारी (या बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए)

एक गाँव में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी (ब्राह्मणी) रहते थे। उनके घर में एक छोटा सा बच्चा था। ब्राह्मणी ने घर में एक नेवला पाल रखा था, जो बच्चे से बहुत हिल-मिल गया था। एक दिन ब्राह्मणी अपने बच्चे को पालने में सुलाकर कुएँ पर पानी भरने के लिए बाहर गई। जब वह पानी का घड़ा भरकर लौटी, तो उसने दरवाजे पर नेवले को देखा। नेवले का मुँह खून से सना हुआ था। ब्राह्मणी घबरा गई। उसे लगा कि इस भयानक जानवर ने उसके प्यारे बच्चे को मार डाला है।

इसी शंका और क्रोध में आकर उसने पानी से भरा भारी घड़ा नेवले पर जोर से पटक दिया। नेवला वहीं तड़पकर मर गया। जब ब्राह्मणी दौड़कर अंदर गई, तो उसने देखा कि उसका बच्चा तो पालने में सुरक्षित सो रहा है। लेकिन पालने के पास ही एक भयंकर जहरीला साँप मरा हुआ पड़ा है, जिसके टुकड़े हो गए थे। तब ब्राह्मणी को पूरी बात समझ में आई कि नेवले ने बच्चे की रक्षा के लिए साँप से लड़ाई की और उसे मार डाला था। अपनी जल्दबाजी पर ब्राह्मणी फूट-फूट कर रोने लगी, लेकिन अब पछताने से क्या फायदा!

सीख: हमें बिना सोचे-समझे और क्रोध में आकर कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए।

प्र. 4. मातृभाषा में अनुवाद कीजिए : (અહીં હિન્દી ફકરાનું ગુજરાતી માતૃભાષામાં અનુવાદ કરવાનું છે.)
આપણા માટે સંસારમાં સૌથી વધુ મૂલ્યવાન આપણું શરીર છે. શરીર દ્વારા જ આપણે બધા કામ કરીએ છીએ. તેથી શરીર સ્વસ્થ રહેવું ખૂબ જરૂરી છે. શરીરને સ્વસ્થ રાખવા માટે વ્યાયામ કરવો આવશ્યક છે. વ્યાયામથી શરીર મજબૂત અને સુડોળ બને છે. અંગેઅંગમાં સ્ફૂર્તિ આવે છે. શરીરમાં આળસ રહેતી નથી.
भाषा-सज्जता (पृष्ठ 33-34)

• निम्नलिखित वाक्यों में सर्वनाम शब्द छाँटिएँ तथा उनके प्रकार भी बताइए।

(1) हम पाठशाला जाएँगे।
सर्वनाम: हम (प्रकार: पुरुषवाचक सर्वनाम - उत्तम पुरुष)
(2) यह मेरी किताब है।
सर्वनाम: यह (प्रकार: निश्चयवाचक सर्वनाम), मेरी (प्रकार: पुरुषवाचक सर्वनाम)
(3) कोई आ रहा है।
सर्वनाम: कोई (प्रकार: अनिश्चयवाचक सर्वनाम)
(4) तुम्हें क्या चाहिए ?
सर्वनाम: तुम्हें (प्रकार: पुरुषवाचक सर्वनाम), क्या (प्रकार: प्रश्नवाचक सर्वनाम)
(5) यह मीना है जिसने कल गीत गाया था।
सर्वनाम: यह (प्रकार: निश्चयवाचक सर्वनाम), जिसने (प्रकार: संबंधवाचक सर्वनाम)
(6) मैं स्वयं चला जाऊँगा।
सर्वनाम: मैं (प्रकार: पुरुषवाचक सर्वनाम), स्वयं (प्रकार: निजवाचक सर्वनाम)

• कोष्ठक में दिए गए सर्वनाम शब्दों के उचित रूप से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(1) यह कार्य मुझसे नहीं हो सकेगा। (मैं)
(2) पापा ने तुम्हें बुलाया है। (तुम)
(3) जो लड़की वहाँ खड़ी है, मैं उसे नहीं जानता। (वह)
(4) लगता है इसे मेरी बात अच्छी नहीं लगती। (यह)
(5) यह काम किन लोगों ने किया ? (कौन)
योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 34)

• एक छात्र के रूप में राष्ट्र के विकास में आप क्या योगदान कर सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।

एक छात्र के रूप में राष्ट्र के विकास में मेरा सबसे बड़ा योगदान यह होगा कि मैं लगन से शिक्षा प्राप्त करूँ और एक आदर्श, ईमानदार नागरिक बनूँ। मैं अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखूँगा, पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ लगाऊँगा, और समाज में फैले अंधविश्वास या कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करूँगा। मैं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा। मेरे ये छोटे-छोटे अच्छे कार्य राष्ट्र के विकास में बड़ा योगदान देंगे।
पुनरावर्तन 1 (पृष्ठ 35)
प्र. 1. इन शब्दों को शब्दकोश के क्रम में लिखिए : (राष्ट्रभाषा, थोड़ा, निशा, पेट, फल, गृह, सूर्य, आकार, समीक्षा)
हिन्दी शब्दकोश के क्रमानुसार शब्द इस प्रकार होंगे:

आकार

गृह

थोड़ा

निशा

पेट

फल

राष्ट्रभाषा

समीक्षा

सूर्य


प्र. 2. इन शब्दों का लिंग परिवर्तन करके वाक्य में प्रयोग कीजिए : (युवक, पंडित, छात्र, अध्यापक, डॉक्टर, माली)
  • (1) युवक -> युवती : (वाक्य) उपवन में एक सुंदर युवती गीत गा रही है।
  • (2) पंडित -> पंडिताइन : (वाक्य) पंडिताइन मंदिर में भगवान की पूजा कर रही हैं।
  • (3) छात्र -> छात्रा : (वाक्य) हमारी कक्षा की छात्रा ने दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • (4) अध्यापक -> अध्यापिका : (वाक्य) अध्यापिका बच्चों को बहुत ही स्नेह से पढ़ा रही हैं।
  • (5) डॉक्टर -> महिला डॉक्टर : (वाक्य) अस्पताल में एक नई महिला डॉक्टर आई हैं। (नोट: बोलचाल में 'डॉक्टरनी' भी कहा जाता है, पर 'महिला डॉक्टर' अधिक शुद्ध है।)
  • (6) माली -> मालिन : (वाक्य) मालिन ताजे फूलों की माला गूँथ रही है।

प्र. 3. निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन करके वाक्य में प्रयोग कीजिए : (मूर्ति, दिशा, कहानी, गमला)
  • (1) मूर्ति -> मूर्तियाँ : (वाक्य) भारत के प्राचीन मंदिरों में कई सुंदर मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं।
  • (2) दिशा -> दिशाएँ : (वाक्य) सूर्य के निकलते ही चारों दिशाएँ प्रकाश से जगमगा उठीं।
  • (3) कहानी -> कहानियाँ : (वाक्य) मेरी दादी माँ मुझे रात को सोने से पहले नई-नई कहानियाँ सुनाती हैं।
  • (4) गमला -> गमले : (वाक्य) मेरे घर के बगीचे में रंग-बिरंगे फूलों के कई गमले रखे हुए हैं।

प्र. 4. नीचे दिए गए शब्दों में उचित उपसर्ग अथवा प्रत्यय जोड़ते हुए नए शब्द बनाइए :
  • (1) वि + ज्ञान = विज्ञान (अथवा अ + ज्ञान = अज्ञान)
  • (2) मानव + ता = मानवता
  • (3) सम् + मुख = सम्मुख (अथवा वि + मुख = विमुख)
  • (4) गैर + हाजिर = गैरहाजिर
  • (5) समाज + इक = सामाजिक (यहाँ 'स' का 'सा' हो जाता है नियम के अनुसार)
  • (6) कुल + पति = कुलपति (अथवा कुल + ईन = कुलीन)
  • (7) अ + हिंसा = अहिंसा
  • (8) शान + दार = शानदार
06 भरत 4 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 40-41)
प्र. 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) इस एकांकी के आधार पर बालक सर्वदमन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
बालक सर्वदमन बहुत निडर, साहसी और हठीला है। वह तपोवन में हिंसक पशुओं (सिंह के बच्चे) के साथ बिना किसी डर के खेलता है। वह किसी के रोकने पर भी नहीं रुकता। उसका मुख अग्नि के समान तेजस्वी है और उसके हाथों में चक्रवर्ती सम्राटों के लक्षण दिखाई देते हैं। वह बहुत सुंदर और आकर्षक है।
(2) सर्वदमन के व्यवहारों को देखकर दुष्यन्त के मन में कौन-कौन से विचार आते थे ?
सर्वदमन की निडरता और बाल-सुलभ चंचलता को देखकर राजा दुष्यंत के मन में स्वाभाविक वात्सल्य (प्रेम) उमड़ रहा था। वे सोचते थे कि धन्य हैं वे लोग जो ऐसे सुंदर बच्चों को गोद में लेते हैं। बालक के हाथ में चक्रवर्ती सम्राट के लक्षण देखकर और यह जानकर कि यह बालक 'पुरुवंशी' है, दुष्यंत के मन में यह विचार आने लगा कि काश ! यह मेरा ही पुत्र हो।

प्र. 2. इस एकांकी में निम्नलिखित पात्रों में अंतर्निहित मूल्य बताइए :
(1) दुष्यंत:
राजा दुष्यंत के चरित्र में वात्सल्य भाव, पितृप्रेम, बच्चों के प्रति गहरा स्नेह, शूरवीरता और एक राजा का उत्तरदायित्व जैसे मूल्य देखने को मिलते हैं।
(2) सर्वदमन:
बालक सर्वदमन के चरित्र में निडरता, असीम साहस, प्राकृतिक जीवों के प्रति निकटता, बाल-सुलभ हठ (जिद्दीपन) और तेजस्विता जैसे मूल्य अंतर्निहित हैं।

प्र. 3. इस परिच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(1) एक अच्छा जंगल क्या कहलाता है ?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एक अच्छा जंगल "जैविक भंडार घर" कहलाता है।
(2) जंगल को ज्यादा छाँटने या खत्म करने से क्या नुकसान होता है ?
जंगल को एक सीमा से भी ज्यादा छाँटने या खत्म करने से वे पेड़-पौधे और बहुमूल्य चीजें भी नष्ट हो जाती हैं, जिनकी हमें भविष्य में बहुत जरूरत हो सकती है (जैसे कोई संभावित पौधा या खाने की औषधीय वस्तु)।
(3) इस परिच्छेद का उचित शीर्षक दीजिए।
इस परिच्छेद का उचित शीर्षक "जंगलों का महत्त्व" या "जैविक भंडार घर : जंगल" हो सकता है।
(4) पर्यायवाची लिखिए : जंगल, घर, बहुत
  • जंगल: वन, कानन, अरण्य
  • घर: गृह, आवास, भवन
  • बहुत: अधिक, ज्यादा, प्रचुर
  • (5) इस परिच्छेद-आधारित दो सवाल बनाइए।
  • १. जंगल किन चीजों का भंडार घर है?
  • २. एक अच्छा जंगल क्या-क्या उगाकर रखता है?

प्र. 4. सोच अपनी-अपनी...
(1) आपको कौन-सा टी.वी. प्रोग्राम अच्छा लगता है ? क्यों ? दस-पन्द्रह वाक्यों में वर्णन कीजिए।
(यह छात्र के विचारने योग्य प्रश्न है, इसका एक आदर्श उत्तर इस प्रकार है:) मुझे टी.वी. पर 'डिस्कवरी चैनल' (Discovery Channel) और 'कौन बनेगा करोड़पति' जैसे प्रोग्राम बहुत अच्छे लगते हैं। इन कार्यक्रमों को देखने से मेरे सामान्य ज्ञान (General Knowledge) में बहुत वृद्धि होती है। इनमें विज्ञान, प्रकृति, इतिहास और भूगोल की रोचक जानकारियाँ मिलती हैं। इनमें दिखाए जाने वाले जानवरों और जंगलों के दृश्य मुझे प्रकृति के करीब ले जाते हैं। यह केवल मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि हमारी शिक्षा और तार्किक शक्ति को भी बढ़ाते हैं। इसलिए, खाली समय में मैं ऐसे ज्ञानवर्धक प्रोग्राम ही देखना पसंद करता हूँ।
(2) कक्षा में पढ़ाई कर रहे हों और धरतीकंप आ जाए तो आप क्या करेंगे?
(यह छात्र की सूझबूझ का प्रश्न है:) यदि कक्षा में पढ़ाई करते समय अचानक धरतीकंप (भूकंप) आ जाए, तो मैं सबसे पहले घबराऊँगा नहीं और शांति बनाए रखूँगा। मैं तुरंत अपनी डेस्क या बेंच के नीचे छिप जाऊँगा और अपने सिर को दोनों हाथों से ढँक लूँगा ताकि ऊपर से कोई चीज़ गिरने पर चोट न लगे। कंपन रुकने के बाद, मैं अपने शिक्षक के निर्देशों का पालन करते हुए, बिना धक्का-मुक्की किए पंक्ति में कक्षा से बाहर निकलकर खुले मैदान में चला जाऊँगा।
स्वाध्याय (पृष्ठ 41-42)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) ऋषियों ने बालक का नाम सर्वदमन क्यों रखा ?
बालक जंगल के भयानक और हिंसक पशुओं (जैसे सिंह के बच्चों) के साथ भी बिना किसी डर के खेलता था और उन्हें सताता था। वह अपनी वीरता से सबका दमन करता था। उसके इसी असीम साहस को देखकर ऋषियों ने उसका नाम 'सर्वदमन' (सबका दमन करने वाला) रखा था।
(2) दुष्यंत बालक के प्रति क्यों आकृष्ट हो रहे थे ?
बालक सर्वदमन का मुख अग्नि के समान दमक रहा था। उसकी निडरता, उसका बाल-सुलभ हठ, तुतली बोली और उसके हाथों में चक्रवर्तियों जैसे लक्षण देखकर राजा दुष्यंत का हृदय वात्सल्य से भर गया और वे स्वाभाविक रूप से उस बालक के प्रति आकृष्ट हो रहे थे।
(3) दुष्यंत ने पुरुवंशीय जीवन की कौन-सी दो रीतियाँ बताई ?
दुष्यंत ने पुरुवंशियों की दो रीतियाँ बताईं:
  • १. युवावस्था में वे महलों में रहकर पृथ्वी की रक्षा और प्रजा का पालन करते हैं।
  • २. वृद्धावस्था आने पर वे वन में जाकर जितेन्द्रिय तपस्वियों के आश्रम में वृक्षों के नीचे कुटिया बनाकर रहते हैं।

प्र. 2. चित्रों का अवलोकन करके अपने शब्दों में कहानी लिखिए। (પેજ 41 પર આપેલા 6 ચિત્રો પરથી વાર્તા - લાકડાકાપનાર અને જળદેવતાની વાર્તા)

कहानी का शीर्षक : ईमानदार लकड़हारा

एक गाँव में एक बहुत ही गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज पास के जंगल में जाता, लकड़ियाँ काटता और उन्हें बेचकर अपने परिवार का पेट पालता था। एक दिन वह नदी के किनारे एक पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काट रहा था। अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी फिसल गई और नीचे गहरी नदी में गिर गई।

लकड़हारा पेड़ से उतरा और नदी के किनारे बैठकर फूट-फूटकर रोने लगा, क्योंकि उसके पास दूसरी कुल्हाड़ी खरीदने के भी पैसे नहीं थे। उसकी सच्ची पुकार सुनकर नदी में से जल-देवता प्रकट हुए। उन्होंने लकड़हारे से रोने का कारण पूछा। लकड़हारे ने सारी बात बता दी।

जल-देवता ने नदी में डुबकी लगाई और बाहर आकर लकड़हारे को एक 'सोने की कुल्हाड़ी' दिखाई और पूछा, "क्या यह कुल्हाड़ी तुम्हारी है?" लकड़हारे ने कहा, "नहीं प्रभु! मेरी कुल्हाड़ी सोने की नहीं है।" जल-देवता ने फिर डुबकी लगाई और इस बार 'चाँदी की कुल्हाड़ी' निकाली। लकड़हारे ने इसे भी अपनी मानने से इनकार कर दिया।

तीसरी बार जल-देवता ने 'लोहे की कुल्हाड़ी' निकाली। उसे देखते ही लकड़हारा खुशी से उछल पड़ा और बोला, "हाँ प्रभु! यही मेरी कुल्हाड़ी है।" जल-देवता लकड़हारे की इस ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे उसकी लोहे की कुल्हाड़ी तो दी ही, साथ में सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी इनाम के रूप में दे दीं। लकड़हारा खुशी-खुशी अपने घर लौट गया।

सीख: ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।
भाषा-सज्जता (पृष्ठ 42-44)

• आप विशेषण तथा उसके प्रकार पढ़ चुके हैं। निम्नलिखित वाक्यों में विशेषण पहचानकर उनके प्रकार लिखिए :

(1) ओम चतुर लड़का है।
विशेषण: चतुर (प्रकार: गुणवाचक विशेषण)
(2) श्याम बीस किलो आटा लाया।
विशेषण: बीस किलो (प्रकार: निश्चित परिमाणवाचक विशेषण)
(3) सानिया बाजार से थोड़ी चीनी लायी।
विशेषण: थोड़ी (प्रकार: अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण)
(4) साहिल के पास दस रुपए हैं।
विशेषण: दस (प्रकार: निश्चित संख्यावाचक विशेषण)
(5) कुछ लड़के उद्यान में खेल रहे हैं।
विशेषण: कुछ (प्रकार: अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण)

• निम्नलिखित विशेषणों का तीन प्रकार से वाक्य में उपयोग कीजिए: (પાઠ્યપુસ્તકમાં આપેલા ઉદાહરણ (क, ख, ग) મુજબ ત્રણેય કક્ષાઓમાં વાક્યો બનાવવાના છે)

(1) सुंदर (क) मोर सुंदर पक्षी है। (सामान्य विशेषता) (ख) मोर कबूतर से सुंदर पक्षी है। (दो में तुलना) (ग) मोर सबसे सुंदर पक्षी है। (सबसे अधिक/कम)
(2) बड़ा (क) हाथी बड़ा जानवर है。 (ख) हाथी शेर से बड़ा जानवर है。 (ग) हाथी जंगल का सबसे बड़ा जानवर है।
(3) मेहनती (क) रामू मेहनती किसान है。 (ख) रामू शामू से मेहनती किसान है。 (ग) रामू गाँव में सबसे मेहनती किसान है।
(4) चालाक (क) लोमड़ी चालाक जानवर है。 (ख) लोमड़ी कुत्ते से चालाक जानवर है。 (ग) लोमड़ी सबसे चालाक जानवर है।

• लिंग-परिवर्तन इन उदाहरण के आधार पर निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिर्वतन कीजिए :

  • (1) हिरन = हिरनी
  • (2) शिक्षक = शिक्षिका
  • (3) पंडित = पंडिताइन
योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 44)

(આ પ્રવૃત્તિઓ વિદ્યાર્થીઓએ જાતે અથવા વર્ગખંડમાં કરવાની છે. તેનો માર્ગદર્શક ઉત્તર નીચે મુજબ છે:)

• पुस्तकालय से पुस्तक लेकर दुष्यंत-शकुंतला की कथा पढ़िए।

(छात्रों के लिए प्रवृत्ति) छात्र अपने विद्यालय के पुस्तकालय से 'महाभारत' (आदिपर्व) या कालिदास रचित 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' की कहानी की पुस्तक लेकर महर्षि कण्व के आश्रम में शकुंतला का पालन-पोषण, राजा दुष्यंत से उनका गंधर्व विवाह, ऋषि दुर्वासा का शाप और अंगूठी खोने के कारण राजा का शकुंतला को भूल जाना तथा अंत में भरत के जन्म और मिलन की पूरी कथा पढ़ सकते हैं।

• इस एकांकी का छात्रों से नाट्यीकरण करवाइए।

(कक्षा-प्रवृत्ति) शिक्षक कक्षा में छात्रों को अलग-अलग पात्र (जैसे एक छात्र को बालक सर्वदमन, दूसरे को राजा दुष्यंत और दो छात्राओं को तपस्विनी) बनाकर इस पूरे पाठ का संवाद सहित अभिनय (नाटक) करवाएं।
07 सोच अपनी-अपनी 4 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 45-46)

• नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। फिर उन पर आधारित प्रश्नों पर कक्षा में वाद-विवाद करवाइए :

(1) दोनों चित्रों में क्या अंतर है ?
  • चित्र 1 (गाँव) : गाँव के चित्र में प्राकृतिक दृश्य है, जहाँ नदी बह रही है। लोग नदी में नहा रहे हैं, औरतें पानी भर रही हैं और कपड़े धो रही हैं। कुछ लोग जानवरों को पानी पिला रहे हैं। कच्चे घर, पेड़-पौधे और खुला, प्रदूषण मुक्त वातावरण दिखाई दे रहा है।
  • चित्र 2 (नगर/शहर) : नगर के चित्र में पक्की और चौड़ी सड़कें हैं। वाहनों (कार, बस) की भारी भीड़ है। बड़ी-बड़ी इमारतें (बहुमंजिला मकान) हैं। यातायात के साधनों और फैक्ट्रियों के कारण शहर में प्रदूषण और शोरगुल दिखाई दे रहा है।
  • (2) गाँव तथा नगर के जीवन में क्या अंतर है और तुम्हें कौन-सा रुचिकर लगता है ? क्यों ?
गाँव के जीवन में सादगी, शांति और प्रदूषण मुक्त वातावरण होता है। लोग मिल-जुलकर रहते हैं, लेकिन वहाँ आधुनिक सुख-सुविधाओं (जैसे बड़े अस्पताल, उच्च शिक्षा) का अभाव होता है। दूसरी ओर, नगर के जीवन में आधुनिक सुख-सुविधाएँ, पक्की सड़कें और अच्छी शिक्षा होती है, लेकिन वहाँ भीड़-भाड़, प्रदूषण और शोरगुल अधिक होता है। मुझे गाँव का जीवन अधिक रुचिकर लगता है, क्योंकि वहाँ का शांत और शुद्ध पर्यावरण स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है और लोगों में आपसी प्रेमभाव अधिक देखने को मिलता है। (यदि किसी छात्र को नगर रुचिकर लगता है, तो वह उसके विकास का कारण बता सकता है।)
(3) क्या तालाब का जल पीने के लिए योग्य है ? यदि नहीं, तो क्यों ?
नहीं, तालाब का जल पीने योग्य नहीं होता है। क्योंकि तालाब के पानी में लोग नहाते हैं, कपड़े धोते हैं, और अपने जानवरों (पशुओं) को भी नहलाते हैं। इसके कारण पानी में गंदगी और कीटाणु मिल जाते हैं। ऐसा प्रदूषित पानी पीने से हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी भयानक बीमारियाँ हो सकती हैं।

• नीचे दिए हुए मुद्दों के आधार पर "विज्ञान वरदान या अभिशाप" इस विषय के एक पक्ष पर अपने विचार कारण सहित प्रस्तुत कीजिए। (मुद्दे: प्रदूषण, बिजली, अंतरिक्ष की खोज, डॉक्टरी सुविधा, दूरभाष, कम्प्यूटर, परमाणु, बम, पिस्तौल, यातायात, ग्लोबल वॉर्मिंग)

(यहाँ दोनों पक्षों के विचार दिए गए हैं, छात्र किसी एक पक्ष पर बोल सकते हैं)

विज्ञान वरदान के रूप में (पक्ष): विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को बेहद सुखद और आरामदायक बना दिया है। बिजली, दूरभाष (टेलीफोन/मोबाइल), कम्प्यूटर, इंटरनेट और यातायात के साधनों ने पूरी दुनिया को एक गाँव बना दिया है। चिकित्सा (डॉक्टरी सुविधा) के क्षेत्र में असाध्य रोगों का इलाज संभव हुआ है जिससे मृत्यु दर घटी है। अंतरिक्ष की खोजों ने हमें नए ग्रहों की जानकारी दी है।

विज्ञान अभिशाप के रूप में (विपक्ष): विज्ञान के कारण ही प्रदूषण और 'ग्लोबल वॉर्मिंग' जैसी भयानक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। कारखानों से निकलने वाले धुएँ और रसायनों ने पर्यावरण को दूषित कर दिया है। विज्ञान ने हमें परमाणु बम, मिसाइल और पिस्तौल जैसे घातक हथियार दिए हैं, जो चंद मिनटों में पूरी दुनिया को नष्ट कर सकते हैं। अतः यदि विज्ञान का उपयोग विनाश के लिए हो, तो यह एक बड़ा अभिशाप है।

• कौन शक्तिशाली है 'कलम या तलवार', अपने विचार कारण सहित बताइए।

मेरे विचार से 'कलम' तलवार से अधिक शक्तिशाली है। तलवार केवल डरा-धमकाकर या बलपूर्वक लोगों के शरीर पर विजय प्राप्त कर सकती है, और उसका प्रभाव कुछ समय तक ही रहता है। लेकिन कलम (ज्ञान और विचारों की शक्ति) में वह ताकत है जो लोगों के मन और समाज की सोच को बदल सकती है। साहित्य, लेखों और पुस्तकों के माध्यम से समाज में बड़ी-बड़ी क्रांतियाँ लाई जा सकती हैं। कलम द्वारा लिखे गए विचार युगों-युगों तक अमर रहते हैं। इसलिए कलम की शक्ति महान है。

• दी गई सामग्री (बहुत दूर जन्म ले रहा है धरती जैसा ग्रह) पढ़िए और उसके आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(1) अंतरिक्ष की किस घटना से वैज्ञानिक उत्साहित हैं ?
हमारी पृथ्वी से 424 प्रकाश वर्ष दूर गर्म गर्द-गुबार के बीच धरती जैसा एक नया ग्रह आकार ग्रहण कर रहा है। अंतरिक्ष में नए ग्रह के जन्म लेने की इस दुर्लभ घटना को देखकर वैज्ञानिक उत्साहित हैं。
(2) पृथ्वी जैसा ग्रह बनने के लिए अंतरिक्ष में किस प्रकार की स्थिति होना आवश्यक है ?
पृथ्वी जैसा ग्रह बनने के लिए तारे के इर्द-गिर्द धूल की गहरी रिंग (पट्टियाँ) बननी चाहिए। यह रिंग सौरमंडल के 'बसने योग्य' क्षेत्र में जमा होनी चाहिए। इसके बाहर की ओर बर्फीली बेल्ट का होना भी आवश्यक है, जिससे पानी मौजूद होने की संभावना बनती है。
(3) रेखा खींचकर सही जोड़े मिलाइए :
  • ४२४ प्रकाश वर्ष = पृथ्वी से नए ग्रह की दूरी
  • १.६ करोड़ वर्ष = नए ग्रह की उम्र
  • १० करोड़ वर्ष = पूर्ण ग्रह बनने में लगनेवाला समय
  • स्पिट्जर स्पेस = नासा का टेलिस्कोप
  • कैरी सिस्से = वैज्ञानिक
स्वाध्याय (पृष्ठ 47-48)
प्र. 1. उदाहरण के आधार पर उपसर्ग लगाकर शब्द पुनः लिखिए : (वि, प्र, अ, दुर्, अध्, निर्, गैर)
  • (1) भिन्न = विभिन्न
  • (2) देश = विदेश (या प्रदेश)
  • (3) पका = अध्पका
  • (4) गम = दुर्गम
  • (5) योग = प्रयोग (या वियोग)
  • (6) जीव = निर्जीव
  • (7) बल = निर्बल (या दुर्बल)
  • (8) समझ = गैरसमझ (या नासमझ, परंतु दिए गए कोष्ठक के अनुसार 'गैर' उपसर्ग उचित है)
  • (9) सुविधा = असुविधा
  • (10) वांछित = अवांछित

प्र. 2. उदाहरण के आधार पर प्रत्यय लगाकर शब्द पुनः लिखिए : (ई, ता, इत, इक)
  • (1) नियम + इत = नियमित
  • (2) विदेश + ई = विदेशी
  • (3) प्रकृति + इक = प्राकृतिक ('प्रकृति' में 'इक' प्रत्यय लगने से पहला स्वर दीर्घ हो जाता है)
  • (4) पुत्र + ई = पुत्री
  • (5) लापरवाह + ई = लापरवाही
  • (6) चंचल + ता = चंचलता
  • (7) यंत्र + इक = यांत्रिक ('यंत्र' में 'इक' लगने से यांत्रिक बनता है)
  • (8) मानव + ता = मानवता
  • (9) हँस + ई = हँसी

प्र. 3. चित्र के आधार पर काव्य की रचना कीजिए : (चित्र: घड़ी)
घड़ी लगी दीवार पर, टिक-टिक कर तू चलती है। समय का मोल बताती सबको, हर पल आगे बढ़ती है। रुकना कभी न तुमने सीखा, दिन-रात निरंतर चलती है।

प्र. 4. देश की उन्नति, विकास एवं रक्षा के लिए आप क्या बनना चाहेंगे "किसान या सैनिक"? कारण सहित अपने मित्र को पत्र द्वारा बताइए ।
  • पता: १२, विकास नगर सोसाइटी, अहमदाबाद। दिनांक : 26 जुलाई 2026
  • प्रिय मित्र रमेश, सप्रेम नमस्ते।
  • मैं यहाँ कुशल-मंगल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी वहाँ आनंद से होगे। तुमने अपने पिछले पत्र में मुझसे पूछा था कि मैं बड़ा होकर देश के लिए क्या बनना चाहता हूँ। मित्र, मैं बड़ा होकर एक 'सैनिक' बनना चाहता हूँ。
  • इसका कारण यह है कि एक सैनिक बनकर मैं अपने देश की सीमाओं की रक्षा कर सकता हूँ। देश के नागरिक तभी शांति से सो पाते हैं और अपना विकास कर पाते हैं, जब सीमा पर सैनिक मुस्तैदी से उनकी रक्षा कर रहे होते हैं। बाहरी दुश्मनों और आतंकवादियों से देश को बचाना मैं अपना परम कर्तव्य मानता हूँ। हालाँकि देश के लिए किसान भी बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वह अन्न उगाता है, फिर भी मुझे मातृभूमि की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने की अधिक प्रेरणा मिलती है。
  • मैं कड़ी मेहनत करूँगा और एक दिन भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करूँगा। अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना。
  • तुम्हारा मित्र, रोहित
भाषा-सज्जता (पृष्ठ 48-49)

• निम्नलिखित वाक्यों में से ऐसे पद ढूंढिए जो 'अव्यय' हैं :

(1) उमंग और स्मित घर चले गए।
अव्यय = और
(2) तुम्हें अपने जन्मदिन पर कैमरा चाहिए या मोबाइल फोन ?
अव्यय = या
(3) वाह ! क्या कैच लिया है।
अव्यय = वाह !
(4) दुर्योधन तथा कर्ण में गहरी मित्रता थी।
अव्यय = तথা
(5) वह तेज दौड़ा।
अव्यय = तेज

• सोचिए : आपने जिन शब्दों को अव्यय के रूप में चुना है, क्या वे अव्यय पद हैं? चर्चा कीजिए।

हाँ, हमने जिन शब्दों (और, या, वाह !, तथा, तेज) को चुना है, वे सभी अव्यय पद हैं। क्योंकि इन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, काल या कारक के कारण कोई भी परिवर्तन (विकार) नहीं होता है। ये वाक्य में सदैव अपने मूल रूप में ही प्रयुक्त होते हैं, इसलिए इन्हें अव्यय (अविकारी) पद कहा जाता है।
योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 49)

(यह छात्रों के लिए वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने के नियमों की जानकारी है।)

वाद-विवाद करते समय वक्ता को हमेशा कार्यक्रम के अध्यक्ष को संबोधित करना चाहिए। अशिष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और किसी पर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करना चाहिए। अपनी बात शिष्टाचार के साथ, तार्किक रूप से और दी गई 3 से 5 मिनट की समय-सीमा के भीतर ही समाप्त करनी चाहिए।
08 माँ ! कह एक कहानी 4 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 53)
प्र. 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(1) राहुल के पिताजी कहाँ भ्रमण कर रहे थे? कब?
राहुल के पिताजी बड़े सवेरे उपवन (बगीचे) में भ्रमण कर रहे थे।
(2) आखेटक ने राहुल के पिताजी से क्या माँगा ?
आखेटक (शिकारी) ने राहुल के पिताजी से अपना शिकार किया हुआ आहत (घायल) पक्षी माँगा।
(3) उपवन की शोभा कैसी थी ?
उपवन में तरह-तरह के रंगों वाले फूल खिले थे। उन पर ओस की बूँदें चमक रही थीं और हवा के हल्के झोंकों से फूल हिल-मिल रहे थे, जिससे उनका पानी लहराता हुआ प्रतीत होता था।
(4) माँ से कहानी सुनकर पुत्र ने क्या निर्णय सुनाया ?
माँ से कहानी सुनकर पुत्र राहुल ने यह निर्णय सुनाया कि यदि कोई निर्दोष को मारता है, तो दूसरे को उसे बचाना ही चाहिए। उसने कहा कि मारने वाले (भक्षक) से बचाने वाला (रक्षक) बड़ा होता है, इसलिए न्याय हमेशा दया का ही पक्ष लेता है।
(5) प्रस्तुत कथा काव्य का सार लिखिए।
प्रस्तुत कथा काव्य का सार यह है कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। इस कविता में बालक राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने की जिद करता है। माँ उसे सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) के बचपन की घटना सुनाती हैं कि कैसे उन्होंने तीर से घायल एक हंस को बचाया और आखेटक (शिकारी) देवदत्त ने उस पर अपना अधिकार जताया। अंत में, न्यायालय और राहुल दोनों का यही निर्णय था कि रक्षक हमेशा भक्षक से महान होता है।

प्र. 2. रेखांकित शब्दों के वचन बदलकर वाक्यों को दुबारा लिखिए :
(1) लड़की ने नई सलवार पहनी है।
लड़कियों ने नई सलवारें पहनी हैं।
(2) अध्यापक ने छात्र को कहानी सुनाई।
अध्यापकों ने छात्रों को कहानियाँ सुनाईं।
(3) प्रधानमंत्री ने अपने मंत्री से देश की समस्या पर बातचीत की।
प्रधानमंत्रियों ने अपने मंत्रियों से देश की समस्याओं पर बातचीत की।
(4) इस पत्रिका में जो कविता छपी है, वह बहुत मनोरंजक है।
इन पत्रिकाओं में जो कविताएँ छपी हैं, वे बहुत मनोरंजक हैं।
(5) लू चलने के कारण लता सूख गई है।
लू चलने के कारण लताएँ सूख गई हैं।
स्वाध्याय (पृष्ठ 53-54)
प्र. 1. काव्य पंक्तियों का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए :
(1) “वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे, हलके झोंके हिले-मिले थे, लहराता था पानी।" "लहराता था पानी ? 'हाँ, हाँ, यही कहानी।"
(भावार्थ): इन पंक्तियों का भावार्थ यह है कि बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। उन फूलों पर ओस की बूँदें चमक रही थीं। जब हवा के हल्के झोंके आते थे, तो फूल आपस में हिलते-मिलते थे, जिससे उन पर पड़ी ओस की बूँदें लहराते हुए पानी के समान लगती थीं।
(2) “तू है हठी, मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सवेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे, जहाँ सुरभि मनमानी।” “जहाँ सुरभि मनमानी ? 'हाँ, माँ यही कहानी।'
(भावार्थ): इन पंक्तियों में माँ यशोधरा अपने बेटे राहुल से कहती हैं कि हे मेरे प्यारे बेटे! तू बहुत जिद्दी (हठी) है। तो सुन, एक दिन सुबह-सुबह तुम्हारे पिता बगीचे में घूम रहे थे, जहाँ फूलों की मनमोहक सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

प्र. 2. चित्र के आधार पर अपूर्ण काव्य को पूर्ण कीजिए : माँ मुझ को भी पौधा दे दे मैं भी वृक्ष लगाऊँगा.....
रोज़ उसे मैं पानी दूँगा, बड़ा पेड़ उसे बनाऊँगा। उसकी ठंडी छाया में बैठ, अपनी थकान मिटाऊँगा।

प्र. 3. एक दिन अकबर ने बीरबल से पूछाः "बीरबल दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली कौन है ?" बीरबल ने क्या कहा होगा ? सोचकर कहानी को आगे बढ़ाइए।
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा, "महाराज! दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली एक 'छोटा बच्चा' है।" अकबर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने पूछा, "वह कैसे?" बीरबल ने कहा, "यह मैं आपको कल साबित करके दिखाऊँगा।" अगले दिन बीरबल एक छोटे से प्यारे बच्चे को गोद में लेकर दरबार में आए। अकबर ने उसे प्यार से अपनी गोद में ले लिया। खेलते-खेलते उस बच्चे ने अचानक अकबर की मूँछ खींच ली। तब बीरबल ने कहा, "देखिए महाराज! इस दुनिया में किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं जो आपकी मूँछ को हाथ लगा सके, लेकिन इस छोटे बच्चे ने बिना डरे आपकी मूँछ खींच ली। इसलिए छोटा बच्चा ही सबसे शक्तिशाली है।" अकबर बीरबल की इस चतुराई पर जोर से हँस पड़े।

प्र. 4. अगर पाठशाला के सामने दुर्घटना हुई तो आप क्या करेंगे ?
अगर मेरी पाठशाला के सामने कोई दुर्घटना हो जाती है, तो मैं तुरंत अपने शिक्षकों और बड़ों को सूचित करूँगा। मैं भीड़ को दुर्घटना स्थल से दूर हटाऊँगा ताकि घायल व्यक्ति को खुली हवा मिल सके। घायल व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) देने में मदद करूँगा और आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस (108 नंबर) को फोन करूँगा।

प्र. 5. इस कविता को कहानी के रूप में लिखिए।
एक दिन नन्हें राहुल ने अपनी माँ यशोधरा से कहानी सुनाने की ज़िद की। माँ ने कहा, "ठीक है, मैं तुझे एक कहानी सुनाती हूँ।" एक दिन सुबह तुम्हारे पिता सिद्धार्थ बगीचे में घूम रहे थे। वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले थे और सुगंध फैली थी। अचानक आसमान से तीर से घायल एक हंस उनके पैरों के पास आकर गिरा। तुम्हारे पिता ने उस तड़पते हुए पक्षी को बहुत प्यार से उठाया और उसे नया जीवन दिया।

थोड़ी ही देर में शिकार करने वाला (आखेटक) देवदत्त वहाँ आ गया। उसने अपना शिकार माँगा, लेकिन तुम्हारे पिता ने उसे पक्षी देने से मना कर दिया क्योंकि उन्होंने उसकी रक्षा की थी। दोनों में विवाद बढ़ गया और मामला न्यायालय में गया, जहाँ सभी ने इस बात को सुना। यह कहानी सुनाकर माँ ने राहुल से पूछा, "बताओ बेटा, इस पक्षी पर किसका अधिकार होना चाहिए? तू निर्भय होकर न्याय कर"। राहुल ने तुरंत जवाब दिया, "मारने वाले से बचाने वाले का अधिकार बड़ा होता है। न्याय हमेशा दया का ही पक्ष लेता है"। यह सुनकर माँ बहुत खुश हुईं।

भाषा-सज्जता (पृष्ठ 54-56)
प्र. 1. निम्नलिखित वाक्यों के क्रियापदों को देखकर उनके काल पहचानकर लिखिए :
(1) रजत गा नहीं रहा था, कविता बना रहा था।
भूतकाल
(2) हाँ भैया, अब मैं तेरी बात मानूँगा।
भविष्यकाल
(3) मैं मौन रहकर तुम्हारी सेवा करना चाहता हूँ।
वर्तमानकाल
(4) तुम्हें देखकर मेरा हृदय शीतल होता है।
वर्तमानकाल

प्र. 2. निम्नलिखित वाक्यों को सूचना के अनुसार फिर से लिखिए :
(1) मैं अहमदाबाद जा रहा हूँ। (भविष्यकाल बनाइए)
मैं अहमदाबाद जाऊँगा।
(2) मेहुल मुंबई गया था। (वर्तमानकाल बनाइए)
मेहुल मुंबई जा रहा है। (या मेहुल मुंबई जाता है।)
(3) गीता आइस्क्रीम खाएगी। (भूतकाल बनाइए)
गीता ने आइस्क्रीम खाई। (या गीता आइस्क्रीम खा रही थी।)
योग्यता-विस्तार (पृष्ठ 56)

(આ પ્રવૃત્તિઓ વિદ્યાર્થીઓએ જાતે અથવા વર્ગખંડમાં કરવાની છે. તેનો માર્ગદર્શક ઉત્તર નીચે મુજબ છે:)

(1) पाठशाला के पुस्तकालय से मैथिलीशरण गुप्तजी की पुस्तकें लेकर उनकी अन्य कविताएँ पढ़िए।
(यह छात्रों के लिए एक स्व-प्रवृत्ति है।) छात्र पुस्तकालय से मैथिलीशरण गुप्त जी की 'साकेत', 'पंचवटी' या 'भारत भारती' जैसी पुस्तकें लेकर उनकी अन्य सुंदर कविताएँ पढ़ सकते हैं।
(2) विभिन्न कविताओं का संकलन कीजिए।
(यह छात्रों के लिए संकलन प्रवृत्ति है।) छात्र अपनी डायरी में देशभक्ति, प्रकृति और महापुरुषों से जुड़ी विभिन्न कविताओं का संकलन कर सकते हैं।
(3) अपनी माँ, परिजन या शिक्षक से कोई कहानी सुनकर उसे कविता के रूप में लिखिए।
(छात्रों के लिए रचनात्मक प्रवृत्ति।) उदाहरण के लिए, 'प्यासा कौआ' की कहानी पर आधारित एक स्वरचित कविता:

एक था कौआ, बहुत था प्यासा, घड़े में थोड़ा पानी था सा। कंकड़ उसने डाले घड़े में, पानी आया ऊपर मजे में। पीकर पानी कौआ उड़ गया, अपनी मेहनत से वह खुश हो गया।

09 ममता 3 વિભાગ
अभ्यास (पृष्ठ 62)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) प्रसादजी ने ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति किसे कहा ?
प्रसादजी ने काशी के उत्तर में स्थित 'धर्मचक्र विहार' को, जो मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खंडहर था, ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति कहा है।
(2) शहंशाह हुमायूँ के आदेश का किस प्रकार पालन हुआ ? वह सही था या गलत ? अपने विचारों में स्पष्ट कीजिए।
शहंशाह हुमायूँ ने अपनी जान बचाने वाली ममता की टूटी झोंपड़ी की जगह पक्का घर (महल) बनवाने का आदेश दिया था। इस आदेश का पालन सैंतालीस (47) वर्षों के बाद हुआ, जब उसके पुत्र अकबर ने उस स्थान पर एक विशाल गगनचुंबी अष्टकोण मंदिर बनवाया। मेरे विचार से हुमायूँ के आदेश का पालन तो हुआ, परंतु जिस तरह से हुआ वह पूरी तरह 'गलत' था। क्योंकि उस गगनचुंबी मंदिर के शिलालेख पर केवल हुमायूँ और उसके पुत्र अकबर का नाम लिखा गया, लेकिन उस उदार और आश्रय देने वाली ममता का कहीं कोई ज़िक्र तक नहीं था। यह ममता के त्याग और निःस्वार्थ सेवा के साथ घोर अन्याय था।
(3) कहानी के आधार पर मुख्य पात्र ममता के बारे में कहिए।
ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र पुत्री थी। वह एक बाल-विधवा थी। उसके मन में धन का कोई लोभ नहीं था, इसलिए उसने पिता द्वारा लाए गए स्वर्ण-उपहारों को भी ठुकरा दिया था। वह एक निडर, धर्मपरायण और सच्ची भारतीय नारी थी। अपने पिता के हत्यारे मुगलों से घृणा होने के बावजूद, उसने अपना 'अतिथि-धर्म' निभाया और हुमायूँ को अपनी झोंपड़ी में आश्रय दिया। वह आजीवन गाँव के लोगों के सुख-दुख की सहभागिनी रही। वह एक आदर्श, त्यागी और परोपकारी स्त्री का सटीक उदाहरण है।
(4) कहानी के अंतिम वाक्य को हटाकर कहानी का अंत अपने अनुसार कहिए।
(कहानी का अंतिम वाक्य है: "पर उसमें ममता का कहीं नाम न था।") यदि इस वाक्य को हटाकर मुझे कहानी का अंत करना हो, तो मैं इस प्रकार करूँगा: "उस अष्टकोण मंदिर के शिलालेख पर बड़े अक्षरों में लिखा गया - 'महान आश्रयदात्री ममता की पावन स्मृति में, जहाँ सातों देश के नरेश हुमायूँ ने विश्राम किया था।' इस प्रकार महान सम्राट् अकबर ने एक साधारण परंतु महान भारतीय नारी के त्याग को युगों-युगों के लिए अमर कर दिया।"
स्वाध्याय (पृष्ठ 62 - 66)
प्र. 1. प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(1) ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफरत क्यों थी ?
ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफरत इसलिए थी क्योंकि उसके पिता (रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि) का वध क्रूर और छली पठान सैनिकों ने ही किया था। उसी घटना के कारण उसे हर आततायी और क्रूर सैनिक से घृणा हो गई थी।
(2) ममता की झोंपड़ी में आश्रय माँगने कौन आया?
चौसा के भयानक युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर, अपनी जान बचाने के लिए थका हुआ मुगल बादशाह 'हुमायूँ' एक साधारण पथिक के रूप में ममता की झोंपड़ी में आश्रय माँगने आया था।
(3) अकबर ने अष्टकोण मंदिर कब और कहाँ बनवाया ?
अकबर ने अष्टकोण मंदिर सैंतालीस (47) वर्षों के बाद उस जगह पर बनवाया, जहाँ काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार के खंडहरों के पास ममता की झोंपड़ी स्थित थी, जिसमें उसके पिता हुमायूँ ने विपत्ति के समय एक रात विश्राम किया था।
(4) घोड़े पर सवार होते हुए पथिक ने मिरज़ा से क्या कहा?
घोड़े पर सवार होते हुए पथिक (हुमायूँ) ने अपने सैनिक मिरज़ा से कहा, "मिरज़ा, उस स्त्री को मैं कुछ दे न सका, उसका घर बनवा देना क्योंकि मैंने विपत्ति में यहाँ विश्राम पाया था। यह स्थान भूलना मत।"
(5) किस बात से पता चलता है कि ममता सबके सुख-दुःख की सहभागिनी थी ?
जब ममता सत्तर वर्ष की वृद्धा हो गई थी और शीतकाल में बीमार होकर अपनी झोंपड़ी में पड़ी थी (उसका कंकाल खाँसी से गूंज रहा था), तब उसकी सेवा के लिए गाँव की दो-तीन स्त्रियाँ उसे घेरकर बैठी थीं और उसे सीपी से जल पिला रही थीं। गाँव वालों के इस प्रेम और सेवाभाव से स्पष्ट पता चलता है कि ममता आजीवन सबके सुख-दुःख की सहभागिनी रही थी।

प्र. 2. नीचे दिए गए वाक्यों को निर्देश के अनुसार भिन्न-भिन्न कालों में परिवर्तन कीजिए:
(1) तेनालीरामन के बारे में अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं। (भूतकाल)
तेनालीरामन के बारे में अनेक कहानियाँ प्रचलित थीं।
(2) सुबह होने पर हिना अपने बेटे को साथ लेकर उद्यान में गई। (भविष्यकाल)
सुबह होने पर हिना अपने बेटे को साथ लेकर उद्यान में जाएगी।
(3) प्रिया का गृहकार्य जल्दी समाप्त हो गया। (भविष्यकाल)
प्रिया का गृहकार्य जल्दी समाप्त हो जाएगा।
(4) हर्ष आज उपवास करेगा। (भूतकाल)
हर्ष ने कल उपवास किया था। (अथवा: हर्ष आज उपवास कर रहा था।)
(5) मनोज अक्सर जागता रहता था। (वर्तमानकाल)
मनोज अक्सर जागता रहता है।

प्र. 3. शब्दों के अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
  • (1) दुहिता = पुत्री / बेटी
  • वाक्य: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र दुहिता थी।
  • (2) वेदना = पीड़ा / दुःख
  • वाक्य: चोट लगने के कारण बीमार बच्चे के पैर में बहुत वेदना हो रही थी।
  • (3) उत्कोच = घूस / रिश्वत
  • वाक्य: एक सच्चा और ईमानदार अधिकारी कभी उत्कोच स्वीकार नहीं करता।
  • (4) जीर्ण = वृद्ध / जर्जर / बहुत पुराना
  • वाक्य: सत्तर वर्ष की उम्र में ममता का जीर्ण शरीर खाँसी से काँप रहा था।
  • (5) आततायी = अन्यायी / दूसरों को त्रास देने वाला
  • वाक्य: इतिहास गवाह है कि किसी भी आततायी को उसके पापों की सज़ा अवश्य मिलती है।

प्र. 4. नीचे लिखी कहानी एकवचन में है। इसे बहुवचन में लिखकर उच्च स्वर में पढ़िए : (અહીં આખી વાર્તાને બહુવચનમાં ફેરવવાની છે)
अनेक चिड़ियाँ पेड़ों पर रहती थीं। उनके घोंसले जंगलों के पास थे। घोंसलों में उनके कई बच्चे थे। वे अपने बच्चों के साथ रहती थीं। एक दिन कई शिकारी वहाँ आए। वे चिड़ियों को मारना चाहते थे। चिड़ियों ने बच्चों को घोंसलों में सिर नीचे कर बैठने को कहा। वे खुद वहाँ से उड़ गईं और पत्तों में छिपकर बैठ गईं, शिकारी चिड़ियों को न देखकर वहाँ से चले गए।

प्र. 5. नीचे शरीर के कुछ अंगों के चित्र दिए गए हैं। प्रत्येक अंग से संबंधित तीन-तीन मुहावरे अर्थ सहित लिखकर वाक्य में प्रयोग करें : (चूँकि चित्र में 'मुँह' की जगह 'माथा/सिर' है, इसलिए यहाँ आँख, सिर/माथा, और अन्य सामान्य अंगों के तीन-तीन मुहावरे दिए गए हैं:)
  • आँख:
  • आँखों का तारा होना: (अर्थ - बहुत प्यारा होना) वाक्य: मेरा बेटा मेरी आँखों का तारा है।
  • आँखें खुलना: (अर्थ - सच्चाई का पता चलना या होश आना) वाक्य: परीक्षा में फेल होने के बाद ही रमेश की आँखें खुलीं।
  • आँख चुराना: (अर्थ - सामना न करना या छिपना) वाक्य: उधार के पैसे न चुका पाने के कारण वह मुझसे आँखें चुराता है।
  • माथा / सिर:
  • माथा ठनकना: (अर्थ - संदेह होना या किसी अनिष्ट की आशंका होना) वाक्य: उस अजनबी की मीठी-मीठी बातें सुनकर मेरा माथा ठनका।
  • सिर आँखों पर बैठाना: (अर्थ - बहुत अधिक आदर-सम्मान करना) वाक्य: अच्छे काम करने वालों को समाज सिर आँखों पर बैठाता है।
  • सिर मुंडाते ही ओले पड़ना: (अर्थ - काम शुरू करते ही बाधा आना) वाक्य: अभी तो व्यापार शुरू ही किया था कि अचानक हड़ताल हो गई, इसे कहते हैं सिर मुंडाते ही ओले पड़ना।
  • हाथ:
  • हाथ बँटाना: (अर्थ - मदद करना) वाक्य: छुट्टी के दिन मैं घर के कामों में अपनी माँ का हाथ बँटाता हूँ।
  • हाथ मलना: (अर्थ - पछताना) वाक्य: समय पर पढ़ाई न करने वाले छात्र परीक्षा के बाद हाथ मलते रह जाते हैं।
  • हाथ पीले करना: (अर्थ - विवाह करना) वाक्य: एक गरीब पिता ने बड़ी मुश्किल से अपनी बेटी के हाथ पीले किए।
  • कान:
  • कान भरना: (अर्थ - चुगली करना या भड़काना) वाक्य: मंथरा ने रानी कैकेयी के कान भरे।
  • कान पर जूँ न रेंगना: (अर्थ - किसी बात का कोई असर न होना) वाक्य: मैंने उसे बहुत समझाया पर उसके कान पर जूँ तक नहीं रेंगी।
  • कान का कच्चा होना: (अर्थ - बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों पर विश्वास कर लेना) वाक्य: वह कान का कच्चा है, इसलिए सब पर शक करता है।

प्र. 6. रूपरेखा के आधार पर कहानी लिखिए : (मुद्दे: एक निर्दयी राजा - गुलाम को दंड...)

कहानी का शीर्षक : सिंह और गुलाम (या परोपकार का फल)

प्राचीन काल में एक अत्यंत निर्दयी राजा था। वह अपने सेवकों पर बहुत जुल्म करता था। एक दिन उसने अपने एक गुलाम (दास) को किसी छोटी सी गलती के लिए कठोर दंड दिया। राजा के अत्याचारों से तंग आकर वह गुलाम एक दिन मौका पाकर जंगल में भाग गया。

जंगल में भटकते हुए अचानक उसकी भेंट एक भयंकर सिंह (शेर) से हुई। गुलाम डर गया, परंतु उसने देखा कि सिंह लंगड़ाकर चल रहा है और दर्द से कराह रहा है। सिंह ने अपना एक पैर गुलाम के सामने कर दिया। गुलाम ने साहस करके देखा तो सिंह के पैर में एक बड़ा सा काँटा चुभा हुआ था। गुलाम ने दयालु होकर धीरे से वह काँटा निकाल दिया। सिंह को बहुत आराम मिला। दोनों में अच्छी मित्रता हो गई और वे जंगल में साथ-साथ रहने लगे。

कुछ दिनों बाद, राजा के सैनिकों ने जंगल में उस गुलाम को ढूँढ लिया और उसे गिरफ्तार करके वापस ले गए। राजा ने उसे मौत की सज़ा सुनाई। राजा ने तय किया कि उसे एक भूखे सिंह के सामने पिंजरे में छोड़ दिया जाए ताकि सिंह उसे खा जाए。

तय दिन पर, बड़े से मैदान में गुलाम को छोड़ दिया गया और पिंजरे से एक खूँखार भूखे सिंह को निकाला गया। सिंह दहाड़ता हुआ गुलाम की ओर झपटा, परंतु पास आते ही वह गुलाम को पहचान गया। यह वही सिंह था जिसके पैर से गुलाम ने काँटा निकाला था। सिंह उसे खाने के बजाय उसके पैरों में लोटने लगा और उसका हाथ चाटने लगा। सिंह का यह स्नेहपूर्ण व्यवहार देखकर राजा और सभी दरबारी हैरान रह गए。

जब राजा ने गुलाम से इसका कारण पूछा, तो उसने जंगल की पूरी घटना बता दी। एक खूँखार जानवर के ऐसे कृतज्ञतापूर्ण व्यवहार को देखकर राजा का मन भी पिघल गया। उसने गुलाम और सिंह दोनों को रिहा कर दिया (आज़ाद कर दिया)।

सीख: कर भला, तो हो भला। (परोपकार का फल हमेशा अच्छा मिलता है और जानवर भी प्रेम को समझते हैं।)

प्र. 7. चित्र के आधार पर कहानी लिखिए :

कहानी का शीर्षक - "इंसानियत" या "सच्ची सेवा"

एक दिन बहुत भयंकर गर्मी पड़ रही थी। तेज चिलचिलाती धूप में एक लाचार और प्यासी वृद्ध स्त्री (बूढ़ी औरत) रास्ते के किनारे बैठी थी। प्यास के कारण उसका बुरा हाल था। वह इतनी कमजोर थी कि उससे चला भी नहीं जा रहा था। वह रास्ते से गुजरने वाले लोगों से अपने लिए पानी माँग रही थी。

उસી रास्ते से कुछ लड़के हँसते-खेलते हुए निकले। उस वृद्ध स्त्री ने उनसे भी पानी माँगा, लेकिन वे लड़के बहुत लापरवाह थे। उन्होंने उस गरीब और प्यासी बुढ़िया की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और उसे बिना पानी पिलाए ही वहाँ से आगे चले गए。

थोड़ी देर बाद, उसी रास्ते से एक बहुत ही समझदार और दयालु लड़का गुजरा। उसने देखा कि एक बूढ़ी औरत जमीन पर बैठी है और प्यास से तड़प रही है। उस लड़के को उस वृद्ध स्त्री की ऐसी दयनीय हालत देखकर बहुत दया आई。

वह लड़का तुरंत गया और कहीं से एक बर्तन में पानी ले आया। उसने बहुत ही आदर और प्रेम के साथ उस प्यासी वृद्ध स्त्री को अपने हाथों से पानी पिलाया। ठंडा पानी पीकर उस स्त्री की प्यास बुझी और उसे बहुत राहत मिली。

पानी पीने के बाद, उस वृद्ध स्त्री ने खुश होकर उस दयालु लड़के को आशीर्वाद देते हुए कहा, "तुम बहुत अच्छे बच्चे हो।" उस छोटे से बालक ने अपनी सच्ची और निस्वार्थ सेवा से एक प्यासी वृद्ध स्त्री की मदद की。

सीख: हमें हमेशा लाचार, प्यासे, जरूरतमंद और बुजुर्ग लोगों (वृद्धों) की मदद करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही सच्चा मानव धर्म है।

प्र. 8. नीचे दिए गए शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण पहचान कर वर्गीकृत कीजिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए : (शब्द: हिमालय, मुझे, खट्टा, तुम्हें, बड़ौदा, सपना, साबरमती, सुंदर, छोटा, होशियार, हमारा, गुजरात)
वर्गीकरण और वाक्य प्रयोग

संज्ञा (संज्ञा शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम होते हैं):

हिमालय: (वाक्य) हिमालय भारत के उत्तर में स्थित सबसे ऊँचा पर्वत है।

बड़ौदा: (वाक्य) बड़ौदा गुजरात राज्य का एक बहुत ही सुंदर और ऐतिहासिक शहर है।

सपना: (वाक्य) कल रात सोते समय मैंने एक बहुत ही डरावना सपना देखा। (या, सपना मेरी बहुत अच्छी सहेली है।)

साबरमती: (वाक्य) अहमदाबाद शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।

गुजरात: (वाक्य) गुजरात भारत का एक बहुत ही समृद्ध और विकासशील राज्य है।

सर्वनाम (जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं):

मुझे: (वाक्य) मुझे किताबें पढ़ना बहुत पसंद है।

तुम्हें: (वाक्य) तुम्हें रोज़ सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना चाहिए।

हमारा: (वाक्य) हमारा देश भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

विशेषण (जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं):

खट्टा: (वाक्य) यह नींबू बहुत खट्टा है।

सुंदर: (वाक्य) बगीचे में एक बहुत सुंदर मोर नाच रहा है।

छोटा: (वाक्य) मेरे पास एक छोटा और प्यारा सा पिल्ला है।

होशियार: (वाक्य) रोहन अपनी कक्षा का सबसे होशियार विद्यार्थी है।

पुनरावर्तन 2 (पृष्ठ 67 - 68)
प्र. 1. निम्नलिखित परिच्छेद पढ़िए और इस विषय पर अपने साथियों से पूछने के लिए तीन प्रश्न बनाइए : (परिच्छेद: समय बहुत कीमती है। गया हुआ धन वापस मिल सकता है, पर बीता हुआ समय कभी वापस नहीं लौट सकता...)
परिच्छेद के आधार पर तीन प्रश्न इस प्रकार हैं:

संसार में धन से भी अधिक मूल्यवान क्या है?

हम जीवन में आगे किस प्रकार बढ़ सकते हैं?

समय का सबसे अच्छा उपयोग क्या है?


प्र. 2. नीचे दिए गए शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण पहचान कर वर्गीकृत कीजिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए : (शब्द: पर्वत, उसको, मीठा, नदी, तुम्हें, सूरत, बाल, नर्मदा, सुंदर, बड़ा, मेहनती, हम, भारत)
  • संज्ञा (Noun): पर्वत, नदी, सूरत, बाल, नर्मदा, भारत
  • पर्वत: (वाक्य) हिमालय भारत का सबसे ऊँचा पर्वत है।
  • नदी: (वाक्य) गंगा भारत की एक पवित्र नदी है।
  • सूरत: (वाक्य) सूरत कपड़ों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध शहर है।
  • बाल: (वाक्य) उस छोटी बच्ची के बाल बहुत लंबे हैं।
  • नर्मदा: (वाक्य) नर्मदा गुजरात की सबसे बड़ी नदी है।
  • भारत: (वाक्य) मेरा देश भारत बहुत महान है।
  • सर्वनाम (Pronoun): उसको, तुम्हें, हम
  • उसको: (वाक्य) मैंने उसको पढ़ने के लिए एक अच्छी किताब दी।
  • तुम्हें: (वाक्य) तुम्हें हमेशा बड़ों का आदर करना चाहिए।
  • हम: (वाक्य) हम सब कल घूमने के लिए चिड़ियाघर जाएँगे।
  • विशेषण (Adjective): मीठा, सुंदर, बड़ा, मेहनती
  • मीठा: (वाक्य) यह आम बहुत मीठा है।
  • सुंदर: (वाक्य) बगीचे में एक सुंदर मोर नाच रहा है।
  • बड़ा: (वाक्य) मेरे चाचा जी का मकान बहुत बड़ा है।
  • मेहनती: (वाक्य) रमेश एक बहुत ही मेहनती किसान है।

प्र. 3. दिए गए शब्दों को सही स्थान पर रखिए : (कोष्ठक के शब्द: ऊपर, अभी, यहाँ-वहाँ, अधिक, ओर, धीरे-धीरे)
  • (1) मोनिका अभी खाना बना रही थी।
  • (2) हवाई जहाज ऊपर उड़ रहा है।
  • (3) दिनभर यहाँ-वहाँ देखा।
  • (4) शिक्षक ने विद्यार्थी की ओर देखकर कहा।
  • (5) काम अधिक करो, बातें कम।
  • (6) बिल्ली धीरे-धीरे बाहर निकल गई।

प्र. 4. मौखिक उत्तर दीजिए : (भले ही ये मौखिक प्रश्न हैं, पर आपके नियमानुसार मैंने इनके भी संपूर्ण और विस्तृत लिखित उत्तर दिए हैं)
(1) आपके परिवार में से आपको कौन सबसे ज्यादा पसंद है ? क्यों ?
मुझे मेरे परिवार में सबसे ज्यादा मेरी 'माँ' पसंद है। क्योंकि वे मेरा बहुत अच्छी तरह से खयाल रखती हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक वे मेरी हर जरूरत पूरी करती हैं। वे मुझे अच्छी-अच्छी बातें सिखाती हैं, मेरी पढ़ाई में मदद करती हैं और मेरे हर सुख-दुख में मेरी सच्ची मित्र की तरह साथ देती हैं।
(2) आपके गाँव/शहर के बारे में दस-बारह वाक्य बोलिए।
  • मेरे शहर का नाम अहमदाबाद है।
  • यह गुजरात राज्य का सबसे बड़ा और प्रमुख शहर है।
  • अहमदाबाद शहर साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है।
  • मेरे शहर में कई ऐतिहासिक इमारतें और सुंदर मंदिर हैं।
  • यहाँ का 'कांकरिया तालाब' और 'साबरमती आश्रम' (गाँधी आश्रम) पूरे देश में बहुत प्रसिद्ध हैं।
  • अहमदाबाद अपने सूती कपड़ों के व्यापार और कारखानों के लिए भी जाना जाता है।
  • यहाँ के लोग बहुत मिलनसार, शांतिप्रिय और व्यापारी स्वभाव के हैं।
  • मेरे शहर में यातायात की बहुत अच्छी सुविधाएँ हैं, जैसे बी.आर.टी.एस. (BRTS) और मेट्रो ट्रेन।
  • यहाँ उत्तरायण (पतंग का त्योहार) और नवरात्रि का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।
  • मुझे मेरा अहमदाबाद शहर बहुत पसंद है और मुझे यहाँ रहने पर गर्व है।
  • (3) आपको पसंद हो ऐसी फिल्म का नाम बताकर संक्षेप में कहानी बताइए।
मुझे 'तारे ज़मीन पर' फिल्म बहुत पसंद है। इस फिल्म की कहानी एक छोटे बच्चे 'ईशान अवस्थी' के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे 'डिस्लेक्सिया' (पढ़ने-लिखने में तकलीफ की बीमारी) होती है। उसके माता-पिता उसकी इस परेशानी को नहीं समझ पाते और उसे एक सख्त बोर्डिंग स्कूल (हॉस्टल) में भेज देते हैं। वहाँ वह बहुत उदास रहने लगता है। फिर वहाँ एक नए कला शिक्षक (राम शंकर निकुंभ) आते हैं, जो ईशान की परेशानी को तुरंत पहचान लेते हैं। वे उसे प्यार और सही तरीके से पढ़ाते हैं, जिससे ईशान की पेंटिंग (चित्रकला) की अद्भुत प्रतिभा सबके सामने आती है और वह स्कूल का सबसे होनहार बच्चा बन जाता है। यह फिल्म हमें यह सीख देती है कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष गुण अवश्य होता है।
(4) यदि सूरज न निकले तो क्या होगा ?
यदि सूरज न निकले तो पृथ्वी पर चारों ओर भयंकर अँधेरा छा जाएगा। सूर्य की गर्मी न मिलने से पृथ्वी पर बहुत अधिक ठंड बढ़ जाएगी। सूरज की रोशनी (प्रकाश-संश्लेषण) के बिना पेड़-पौधे अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और सूख जाएँगे। पेड़-पौधे न होने से इंसानों और जानवरों को भोजन नहीं मिलेगा। अंततः, सूर्य के प्रकाश और ऊष्मा के बिना पृथ्वी पर जीवन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा।
(5) यदि आप गाँव के सरपंच होते तो......
यदि मैं गाँव का सरपंच होता, तो मैं अपने गाँव के संपूर्ण विकास के लिए पूरी ईमानदारी से काम करता। मैं गाँव में पक्की सड़कें बनवाता और हर घर में बिजली तथा पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था करता। मैं गाँव के बच्चों के लिए एक अच्छा स्कूल और युवाओं के लिए एक पुस्तकालय (लाइब्रेरी) बनवाता। बीमार लोगों के इलाज के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) खुलवाता। इसके अलावा, मैं गाँव में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देता और पर्यावरण बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने का अभियान चलाता, ताकि मेरा गाँव एक स्वच्छ और आदर्श गाँव बन सके।
ધોરણ ૮ હિન્દી · સ્વાધ્યાયપોથી ઉકેલ મોટા કાજલિયાળા પ્રાથમિક શાળા
Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
Loading...